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जब प्रगणक आए आपके द्वार

जब प्रगणक आए आपके द्वार

कुमार महेंद्र
(जनगणना 2027 के प्रथम चरण _मकान गणना के संदर्भ में कुछ पंक्तियां सादर निवेदित हैं _)


जब प्रगणक आए आपके द्वार…
यह सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि नूतन भारत के निर्माण में आपकी भागीदारी है।
सही जानकारी दें, जागरूक बनें, और देश की प्रगति में अपना अमूल्य योगदान निभाएँ।
आइए, मिलकर एक सशक्त, पारदर्शी और विकसित भारत का निर्माण करें।
✍️ — कुमार महेंद्र


नूतन भारत के निर्माण की,
लेकर पुनीत स्वप्न-लड़ियाँ।
कर्तव्य-पथ पर बढ़ते-बढ़ते,
खिलें संवाद की फुलझड़ियाँ।
‘अतिथि देवो भव’ भाव सजा,
मृदुल-मधुर हो हर व्यवहार।
जब प्रगणक आए आपके द्वार।।


देकर संपूर्ण सही जानकारी,
उज्ज्वल पथ करें प्रशस्त।
गोपनीयता पर अटल विश्वास,
संदेह सभी हों समूल नष्ट।
सजग नागरिक बन परिचय दें,
माँ भारती का करें श्रृंगार।
जब प्रगणक आए आपके द्वार।।


परिसर, भवन, मकान, परिवार—
गणना के ये आधार स्तंभ।
मुखिया, सदस्य, दंपती विवरण,
जीवन-सुख के परिमल गुच्छ।
पेयजल, बिजली, शौचालय संग,
स्वच्छता का विस्तृत संसार।
जब प्रगणक आए आपके द्वार।।


संचार, मोबाइल, वाहन सहित,
जीवन-चर्या का सरल लेखा।
हर प्रविष्टि में पारदर्शिता,
दिखे प्रगति की उजली रेखा।
डिजिटल युग की मधुर छवियाँ,
भरें हृदय में नव उत्सार।
जब प्रगणक आए आपके द्वार।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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