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अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर गूंजा मजदूर सम्मान का संदेश

अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर गूंजा मजदूर सम्मान का संदेश

पटना। राजधानी के अनिसाबाद स्थित उज्ज्वल विचार मंच में आज अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस बड़े ही गरिमामय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लेकर श्रमिकों के योगदान को नमन किया और उनके अधिकारों की मजबूती पर जोर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मंच के अध्यक्ष ने कहा कि “दुनिया के हर निर्माण और विकास के पीछे यदि किसी का सबसे बड़ा योगदान है, तो वह हमारे मेहनतकश मजदूर भाई हैं। इनके सम्मान, एकता और समान अधिकार सुनिश्चित करना हम सबकी जिम्मेदारी है।” उन्होंने यह भी चिंता व्यक्त की कि अनेक मजदूर संगठनों के बावजूद आज भी श्रमिकों को उनका पूर्ण अधिकार नहीं मिल पाया है।

संस्था की सचिव रेणु जी ने महिला श्रमिकों की स्थिति पर विशेष प्रकाश डालते हुए कहा कि “कार्यस्थल पर कार्यरत महिलाओं को सम्मान और समान अवसर मिलना चाहिए। हालांकि कुछ क्षेत्रों में सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी व्यापक स्तर पर उन्हें उनके कौशल के अनुरूप पहचान नहीं मिल पा रही है।” उन्होंने श्रमिकों पर हो रहे अत्याचारों पर चिंता जताते हुए सरकार से ठोस पहल की मांग की।

कार्यक्रम में उपस्थित अन्य सदस्यों ने मजदूरों के मानदेय और कार्य परिस्थितियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर श्रमिकों को उनकी मेहनत के अनुरूप पारिश्रमिक नहीं दिया जाता, जो अन्यायपूर्ण है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है। साथ ही, कार्यस्थलों पर भाषा और व्यवहार की कटुता समाप्त कर सम्मानजनक वातावरण बनाने की अपील की गई।

मंच के सदस्य श्री संजीव कुमार ने कहा कि “मजदूर हमारे देश के विकास की असली ताकत हैं। हमें उनका शोषण नहीं, बल्कि सम्मान करना चाहिए और उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाने में पीछे नहीं हटना चाहिए।”

इस अवसर पर आचार्य श्री संजय कुमार ने “काम करने के लिए मानसिक रूप से स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करना” विषय पर अपने विचार रखते हुए श्रमिकों के मनोबल और गरिमा को सर्वोपरि बताया। उन्होंने अपनी ओजपूर्ण कविता के माध्यम से श्रमिकों के संघर्ष, आत्मसम्मान और राष्ट्रभक्ति को मार्मिक शब्दों में व्यक्त किया—


तूफानों से लड़ना है, इनसे सिखो,
खोदा है पहाड़ों को, पाया कीमती पदार्थों को।
मजदूर है, मजबूर नहीं,
मेहनत से ही सपनों को साकार करेंगे।
मजदूर है, गुलाम नहीं,
अपमान की घूंट पीकर भी कभी लड़खड़ाए नहीं।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने देशभर के श्रमिकों को कोटि-कोटि शुभकामनाएं देते हुए उनके सम्मान और अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया।
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