नगर डगर गाँव शहर, नौतपा का कहर
कुमार महेंद्रनव दिवस प्रचंड ताप अनुपम,
नौतपा सहज प्रकृति-परिभाषा।
ज्येष्ठ मास शुभ आगमन बेला,
तपन-जपन मानसून अभिलाषा।
रोहिणी-पथ रविदेव विराजित,
कण-कण दहके आठों पहर।
नगर डगर गाँव शहर, नौतपा का कहर।।
पच्चीस मई सह दो जून तक,
वर्तमान वर्ष नौतपा काल।
अरुणदेव अरुणिमा अद्भुत,
तप्त प्रतीत वसुंधरा-भाल।
साधना-उपासना श्रेष्ठ समय,
मानव-मन जागे परहित लहर।
नगर डगर गाँव शहर, नौतपा का कहर।।
शीतल पेय, दूध-दही संग,
नारियल-जल सेवन उचित।
अधिक समय गृह-विश्राम हित,
व्यर्थ भ्रमण सर्वथा अनुचित।
धूप प्रखर से रक्षा साधन,
कदम रखें ठहर-ठहर।
नगर डगर गाँव शहर, नौतपा का कहर।।
भास्कर-अवनि नेह अप्रतिम,
मिटती दूरी, गहराए अपनापन।
रश्मि-पुंज आलोकित भू-तन,
दीप्त दिशाएँ, स्नेहिल स्पंदन।
अनंत नमन रवि श्रीचरणों,
सु-वृष्टि कृपा शुभ्र प्रहर।
नगर डगर गाँव शहर, नौतपा का कहर।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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