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गजब दास्तान है!

गजब दास्तान है!

--:भारतका एक ब्राह्मण.
संजय कुमार मिश्र"अणु"
गजब दास्तान है,
सुन रही है आंख और
देख रहा कान है!!
जो नाली में पडा है,
वो सबसे बडा है।
दिल से उतर आंख में गडा है-
यहाँ पर ऐसा भी धडा है।
न देखा,सुना,मिला पर
खुब जानपहचान है!!
जो खुद बहुत भूखा है नंगा है,
उसके आगे खडा भीखमंगा है।
शांति तडफडा रही है-
कोई कहाँ भला चंगा है
मन में बडा छल कपट बस-
चेहरे पर मुस्कान है!!
औरत या फिर मर्द है,
सबका सब बेपर्द है।
गैरों से सहानुभूति है-
अपनों का नहीं दर्द है।
पुछने पर बताता रहता-
वही मान सम्मान है!!
चरित्र इतना ढीला है,
कि सबका पैंट गीला है।
चेहरे पर बदहवासी है-
हरहाल लाल पीला है।
खुदका तो सुझता नहीं
लेकिन औरों ध्यान है!!
बिगाड़ की नीतियां है,
व्यवस्था बेतरतीब है।
दूर दूर रहता है लेकिन
कहता करीब है।
जो दान कुछ देता नहीं-
वो खोजता प्रतिदान है!!
पत्तियाँ गई झड,
लहलहा रहा है जड।
जो जितना किया गडबड-
उसे सब चाहते धडाधड
शराब साफ सुथरी है
दुषित खानपान है!!
मिश्र"अणु"एक बात सुन,
न हाथ मल न सिर धुन।
चल दिया जो छोडकर,
उसीका न ख्वाब बुन।
कहेगा सब एक दिन-
ये मिश्र"अणु" महान है!!
मूर्ख का जमात है,
पढे लिखे को मात है।
पत्नी प्रताड़ित हो रही-
परीयो पर खुब सौगात है।
जब मन कभी मिला नहीं-
बेकार आन जान है!!
सगुन सकार ब्राह्म रूप
भगवती भगवान है!!
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वलिदाद,अरवल(बिहार)८०४४०२.संपर्क... ८३४०७८१२१७.
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