Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

कमल-सा खिला तेरा रूप

कमल-सा खिला तेरा रूप,
नयनों में बसी वो मधुर छवि,
जिसे शब्दों में बाँधना भी एक साधना है…

कमल-सा खिला तेरा रूप

कुमार महेंद्र
अप्रतिम अधर चमक-दमक,
कोकिल-कंठ स्वर मधुर।
नयनों में बसती प्रिय छवि,
पलकों पर मुस्कान प्रखर।
अंग-प्रत्यंग लावण्य निर्झर,
चाल-ढाल रंभा-प्रतिरूप।
कमल-सा खिला तेरा रूप।।


आनन जैसे उदित आदित्य,
अनुराग उर में भरता।
गोल कपोलों की आभा से,
मन स्पर्श हेतु तरसता।
अक्षि-अंबुज में प्रेम झरे,
भाव-सागर प्रणय स्वरूप।
कमल-सा खिला तेरा रूप।।


कटि लय में धीमे डोले,
मानो घटा घनघोर हिले।
चाँदनी हरती तम का अंश,
मन-आँगन आलोक खिले।
अंधेरे मन के कोनों में,
उजियारा फैला अद्भुत रूप।
कमल-सा खिला तेरा रूप।।


मनमोहक यौवन अठखेलियाँ,
प्रिय मिलन की मधुर पुकार।
हाव-भाव में छिपा निमंत्रण,
तृषित मन का मधुर विस्तार।
देख रम्य सौम्य तरुणाई,
भाव-भंगिमा प्रियतम अनुरूप।
कमल-सा खिला तेरा रूप।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ