महिलाओं का योगदान
संजय जैनराग विराग का अब
देखो दौर बचा नही।
त्याग-तपस्या साधना का
दौर भी अब रहा नही।
सत्य अहिंसा सयंम का
कुछ तो दौर शेष रहा।
जिसके कारण ही अब
कुछ तो धर्म बच रहा।।
धर्म साधना और व्रत आदि
अब महिलाएं ही कर रही।
सुख शांति समवृध्दि का भी
श्रेय महिलाएं ही ले रही।
कुशल प्रबंधन के कारण ही
घर में ये सब संभव हो रहा।
इसलिए महिलाओं को सब
एक कुशल प्रबंधक बोल रहे।।
घर बहार की जिम्मेदारी भी
महिलाएं अब उठ रही है।
चार दिवारी में बंद रहने वाली
चाँद पर अब जा रही।
अपनी प्रतिभा का कौशल
सारे विश्व को दिखा रही।
दो-दो कुलों का अब जो
मान-सम्मान बहुत बड़ा रही।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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