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हृदय की भित्ति पर अंकित, बस तुम्हारा नाम

हृदय की भित्ति पर अंकित, बस तुम्हारा नाम

कुमार महेंद्र
हृदय की हर धड़कन पर अब बस एक ही नाम अंकित है…
तुम्हारा..
जहाँ शब्द भी प्रेम बन जाते हैं, और भाव ही जीवन बन जाते हैं।

अंतरंग विमल प्रवाह,
प्रीत-ज्योति का प्रज्वलन।
मृदुल मधुर चाह-बिंब,
तन-मन अनंत मगन।
निहार अक्स अनुपम,
राग-रंग-लय नव ललाम।
हृदय की भित्ति पर अंकित, बस तुम्हारा नाम।।


मंत्रमुग्ध हर एक व्यवहार,
हिय-प्रिय स्वर व्यंजना।
शील-शिष्ट हाव-भाव,
चारु चंद्र-सी ज्योत्स्ना।
सहज सरल मुक्तामुखी,
प्रीत-पल अविस्मय अभिराम।
हृदय की भित्ति पर अंकित, बस तुम्हारा नाम।।


दृष्टि की परिधि में बसता,
सौम्य कोमल रम्य रूप।
मनमोहिनी श्रृंगार-छटा,
परिधान प्रेरणा प्रिय अनुरूप।
अति आकर्षक अंग-सौष्ठव,
मिलन-अभिलाषा अष्टयाम।
हृदय की भित्ति पर अंकित, बस तुम्हारा नाम।।


अंतःकरण पुनीत पावन,
तत्पर स्पर्श प्रणय-बिंदु।
दर्शन आनन रमणीय,
संकेत अंतर अपनत्व-सिंधु।
देख मदमस्त यौवन-अंगड़ाई,
हर पल बनता आनंद-धाम।
हृदय की भित्ति पर अंकित, बस तुम्हारा नाम।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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