द्विदिवसीय बिहार राज्य आचार्यकुल सम्मेलन में ‘जय जगत’ और ‘भूदान’ के सिद्धांतों पर हुआ गहन मंथन, साहित्यकारों एवं पत्रकारों का सम्मान

मुजफ्फरपुर, बिहार। बिहार की सांस्कृतिक और साहित्यिक धरती मुजफ्फरपुर शनिवार को एक महत्वपूर्ण वैचारिक एवं सामाजिक आयोजन की साक्षी बनी, जब नव युवक समिति ट्रस्ट के सभागार में दो दिवसीय बिहार राज्य आचार्यकुल सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, पत्रकारिता और सामाजिक पुनर्निर्माण जैसे विषयों पर केंद्रित इस सम्मेलन में बिहार एवं झारखंड से आए शिक्षाविदों, साहित्यकारों, पत्रकारों, समाजसेवियों, कलाकारों तथा विभिन्न क्षेत्रों के बुद्धिजीवियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्यकुल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व कुलपति आचार्य डॉ. धर्मेंद्र द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। दीप प्रज्वलन के साथ ही सभागार में उपस्थित प्रतिभागियों ने ज्ञान, संस्कृति और मानव कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
‘जय जगत’ और ‘भूदान’ के सिद्धांतों पर आधारित है आचार्यकुल

सम्मेलन को संबोधित करते हुए आचार्यकुल के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं प्रख्यात साहित्यकार सत्येन्द्र कुमार पाठक ने संगठन की विचारधारा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आचार्यकुल केवल एक संगठन नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देने वाला एक वैचारिक आंदोलन है, जिसका मूल आधार ‘जय जगत’ और ‘भूदान यज्ञ’ जैसे मानवीय सिद्धांत हैं।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब समाज अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है, तब शिक्षा, नैतिकता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने युवाओं को राष्ट्र निर्माण और सामाजिक परिवर्तन का वाहक बताते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ी को संस्कारयुक्त शिक्षा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक उत्तरदायित्व पर हुई चर्चा
सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रांची के प्रख्यात विद्वान डॉ. जंगबहादुर पांडेय, मुजफ्फरपुर नगर निगम की उपमहापौर मोनालिसा तथा रांची विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. आर. सी. रॉय शर्मा ने अपने विचार व्यक्त किए।
पूर्व कुलपति डॉ. आर. सी. रॉय शर्मा ने कहा कि समाज में आचार्यों और शिक्षकों की भूमिका केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सामाजिक चेतना और नैतिक मूल्यों के संवाहक भी होते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण मानव अस्तित्व से जुड़ा विषय बन चुका है और इसके प्रति व्यापक जनजागरण की आवश्यकता है।
उपमहापौर मोनालिसा ने नगर विकास, स्वच्छता और सामाजिक सहभागिता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज के सभी वर्गों को मिलकर पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास के लिए कार्य करना चाहिए।
डॉ. संगीता सागर ने किया स्वागत, डॉ. ऊषा श्रीवास्तव ने रखी संगठन की रूपरेखा
कार्यक्रम के प्रारंभ में सम्मेलन की उपाध्यक्ष डॉ. संगीता सागर ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, प्रतिनिधियों और प्रतिभागियों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि आचार्यकुल का उद्देश्य शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाना है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आचार्यकुल के कला-संस्कृति प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय प्रभारी डॉ. ऊषा श्रीवास्तव ने की। उन्होंने संगठन की गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि कला और संस्कृति समाज को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और नई पीढ़ी को उससे जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
100 से अधिक साहित्यकारों, समाजसेवियों और पत्रकारों का सम्मान
सम्मेलन के दौरान साहित्य, शिक्षा, पत्रकारिता, समाज सेवा और सांस्कृतिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लगभग 100 साहित्यकारों, आचार्यकुल प्रतिनिधियों, कलाकारों, समाजसेवियों एवं पत्रकारों को सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह में उपस्थित प्रतिभागियों ने इसे समाज में सकारात्मक कार्य करने वाले व्यक्तियों के लिए प्रेरणादायक पहल बताया।
सम्मान प्राप्त करने वालों में विभिन्न जिलों से आए साहित्यकार, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार शामिल थे, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर समाज में विशिष्ट पहचान बनाई है।
हिंदी पत्रकारिता दिवस पर पत्रकारों की समस्याओं पर विशेष परिचर्चा
संयोगवश शनिवार को हिंदी पत्रकारिता दिवस भी था। इस अवसर को विशेष बनाते हुए सम्मेलन में “पत्रकारों की समस्या और निदान” विषय पर एक विशेष व्याख्यान एवं परिचर्चा सत्र आयोजित किया गया।
इस सत्र में मीडिया जगत की वर्तमान चुनौतियों, पत्रकारों की सुरक्षा, आर्थिक समस्याओं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारिता की विश्वसनीयता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चर्चा हुई।
परिचर्चा में प्रमुख वक्ताओं के रूप में डॉ. राकेश दत्त मिश्र (संपादक, दिव्य रश्मि), जी. एन. भट्ट (संपादक, निर्माण भारती) तथा अनमोल (वरिष्ठ पत्रकार) ने अपने विचार रखे।
डॉ. राकेश दत्त मिश्र ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं, किंतु आज अनेक पत्रकार आर्थिक, सामाजिक और व्यावसायिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारों के हितों की रक्षा और उनके लिए सशक्त नीतियां बनाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
जी. एन. भट्ट ने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्य और समाजहित है तथा इसकी विश्वसनीयता बनाए रखना सभी पत्रकारों की सामूहिक जिम्मेदारी है। वहीं वरिष्ठ पत्रकार अनमोल ने जमीनी पत्रकारों के समक्ष आने वाली समस्याओं और उनके व्यावहारिक समाधान पर प्रकाश डाला।
कवि सम्मेलन में गूंजी बिहार की भाषाई विरासत
सम्मेलन का सांस्कृतिक एवं साहित्यिक सत्र विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। आयोजित कवि सम्मेलन में बिहार की विविध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत की सुंदर झलक देखने को मिली।
कवियों और साहित्यकारों ने बज्जिका, मगही, भोजपुरी, मैथिली और अंगिका भाषाओं में अपनी कविताएं, गीत और रचनाएं प्रस्तुत कीं। लोक संस्कृति, सामाजिक सरोकार, राष्ट्रभक्ति और मानवीय संवेदनाओं से ओत-प्रोत रचनाओं ने उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कवि सम्मेलन के दौरान कई युवा और वरिष्ठ साहित्यकारों ने अपनी नवीन रचनाओं का पाठ किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।
नई पुस्तकों का हुआ विमोचन
साहित्यिक सत्र के दौरान विभिन्न रचनाकारों द्वारा लिखित नवीन पुस्तकों का भी लोकार्पण किया गया। मंचासीन अतिथियों ने पुस्तकों का विमोचन करते हुए लेखकों को शुभकामनाएं दीं और साहित्य सृजन को समाज की चेतना का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
दो दिवसीय बिहार राज्य आचार्यकुल सम्मेलन का दूसरा दिन 31 मई को आयोजित होगा। सम्मेलन के समापन सत्र में संगठन की आगामी कार्ययोजनाओं, शिक्षा एवं संस्कृति के क्षेत्र में नए कार्यक्रमों तथा सामाजिक सुधार से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।आयोजकों के अनुसार यह सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा, साहित्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना को नई दिशा देने का एक सार्थक प्रयास है, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन की सोच को आगे बढ़ाने का कार्य करेगा।
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