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मातृ दिवस को समर्पित

मातृ दिवस को समर्पित 

डाक्टर सुधा सिन्हा
मेरी माता
प्रोफेसर  डाक्टर सुधा सिन्हा 
मेरी माता जब चली गयी,
   मै फ़ूट फूट के रोयी थी ,
जीवन में बीरानी छायी ,
छिनी मेरी खुशहाली थी।


 जीवन  एकाकी बना मेरा,
बनी वह तो बेईमानी थी।

ऊंगली पकड चलना सिखलायी,
जीवन पथ पे दीप जला ,
जब भी कोई आफत आती ,
आंचल में अपने  छिपायी।

जीवन को थपेड़ों  से बचाती,
 मै महलों  की रानी थी।

फोन की घंटी जब भी बजती,
काम काज छोड दौड पडती।
हांथों में मोबाईल  ले कर ,
खूब मैं तो   बतियाती थी।

मस्ती  जीवन मेें छायी थी,
मन में भी तो जवानी थी।

मुझे छोड के चली गयी हो,
जीवन हैउदासी से भरी ,
सारे रिश्ते लगते झूठे,
सभी मुझसे हैं अपने रूठे।

बार बार तुझको मैं पुकारी ,
 तू तो बनी कहानी थी।

मुझे छोड के कहां गयी हो,
इक बार दरस दिखा माई,
 दर पे निगाहें टिकी हुयी हैं,
तुझको भूल नहीं पायी।

कहां गयी हो पास तो आना,
तू ही दिलबरजानी थी।
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