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हास्य का वैश्विक दर्शन: आदिम संस्कृति से आधुनिक 'लाफ्टर योगा'

हास्य का वैश्विक दर्शन: आदिम संस्कृति से आधुनिक 'लाफ्टर योगा'

सत्येन्द्र कुमार पाठक
"हंसी वह सार्वभौमिक भाषा है, जिसे समझने के लिए किसी शब्दकोश की आवश्यकता नहीं होती।" मानव सभ्यता के इतिहास में हास्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहा है, बल्कि यह अस्तित्व की अनिवार्य शर्त रहा है। आज जब हम 3 मई 2026 को विश्व हास्य दिवस मना रहे हैं, तो यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि तनाव से ग्रस्त वैश्विक समाज के लिए एक सामूहिक चिकित्सा है। प्राचीन काल में हास्य का स्वरूप सामूहिक था। जनजातीय संस्कृतियों में शिकार की सफलता या ऋतु परिवर्तन के उत्सवों में हंसी-मजाक मुख्य अंग होता था। भारतीय संदर्भ: संस्कृत साहित्य में 'हास्य रस' को नौ रसों में एक विशिष्ट स्थान दिया गया है। आचार्य भरतमुनि के 'नाट्यशास्त्र' में हास्य के भेदों— स्मित, हसित, विहसित, उपहसित, अपहसित और अतिहसित का विस्तार से वर्णन है। प्राचीन राजदरबारों में 'विदूषक' एक सम्मानित पात्र होता था, जिसके पास राजा को भी उसकी गलतियों पर टोकने का सुरक्षित अधिकार था। यवन (ग्रीक) संस्कृति: यूनानी इतिहास में 'कॉमेडी' शब्द की उत्पत्ति 'कोमोस' (उत्सव) से हुई। अरस्तू ने हास्य को समाज के दर्पण के रूप में देखा। आधुनिक स्वरूप: हास्य एक थेरेपी के रूप में 20वीं सदी के अंत तक आते-आते हास्य एक कला से बढ़कर एक विज्ञान बन गया। डॉ. मदन कटारिया द्वारा 1995 में शुरू किया गया 'लाफ्टर योगा' आंदोलन इस दिशा में क्रांतिकारी कदम था। आज हास्य 'स्टैंड-अप' कॉमेडी, सिटकॉम और डिजिटल मीम्स के माध्यम से वैश्विक संवाद का हिस्सा बन चुका है। प्रत्येक वर्ष मई माह का प्रथम रविवार को विश्व हास्य दिवस मनाया जाता है । विश्व हास्य दिवस की शुरुआत 10 जनवरी 1998 को मुंबई में हुई। इसका उद्देश्य हंसी के माध्यम से विश्व शांति को बढ़ावा देना था। : आज यह दिवस भारत के साथ-साथ 100 से अधिक देशों (जैसे अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, वियतनाम और ब्राजील) में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। 'लाफिंग बुद्धा' (बुदई) को हास्य की वैश्विक पहचान माना जाता है। चीन के प्रसिद्ध भिक्षु 'बुदई' अपनी निरंतर हंसी और प्रसन्नता के लिए जाने जाते थे, जो आज घर-घर में सौभाग्य और उल्लास के प्रतीक के रूप में स्थापित हैं।
हास्य ने हर धर्म में जीवन को सहज बनाने का कार्य किया है: सनातन धर्म: यहाँ सृजन और विनाश दोनों में आनंद का तत्व है। भगवान कृष्ण की 'माखन चोरी' की लीलाएँ और नारद मुनि का हास्य-विनोद धर्म को नीरस होने से बचाता है।बौद्ध धर्म: बुद्ध की 'शांत मुस्कान' इस बात का प्रमाण है कि आंतरिक बोध से ही वास्तविक प्रसन्नता जन्म लेती है। लाफिंग बुद्धा का स्वरूप बौद्ध धर्म के आनंदमय पक्ष को दर्शाता है। सिख पंथ: 'चढ़दी कला' का सिद्धांत सिखाता है कि भीषण कठिनाइयों में भी मुस्कुराहट न खोएं। सिख इतिहास में 'हंसी-मजाक' जीवंतता का पर्याय है। इस्लाम: हदीसों में उल्लेख मिलता है कि पैगंबर मोहम्मद साहब अक्सर मुस्कुराते थे और उन्होंने कहा कि "अपने भाई के चेहरे पर मुस्कान लाना भी सदका (दान) है।" ईसाई धर्म: बाइबिल के अनुसार, "प्रसन्न हृदय एक अच्छी औषधि के समान है।" संत फिलिप नेरी को 'हंसमुख संत' कहा जाता है। पारसी और यहूदी: इन संस्कृतियों में 'व्यंग्य' (Satire) का प्रयोग अक्सर कठिन राजनैतिक और सामाजिक परिस्थितियों में मनोबल बनाए रखने के लिए किया जाता रहा है।
. हास्य के अधिष्ठाता: देव और देवी -हास्य संस्कृति के भी अपने दिव्य स्वरूप हैं । मॉमस - ग्रीक पौराणिक कथाओं में इन्हें हास्य, व्यंग्य और लेखकों का देवता माना जाता है। थेलिया - ये ग्रीक नौ 'म्यूज' (कला की देवियां) में से एक हैं, जो विशेष रूप से हास्य और उल्लासपूर्ण कविता की देवी हैं। भगवान शिव के गणों (शिवगण) को हास्य और विचित्रता का अधिपति माना जाता है, जो जीवन के हर रूप में आनंद खोजने का संदेश देते हैं। वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्य पक्ष में आधुनिक विज्ञान ने प्रमाणित किया है कि हंसते समय हमारे शरीर में रासायनिक परिवर्तन होते हैं: एंडोर्फिन का स्राव: इसे 'नेचुरल पेनकिलर' कहा जाता है। तनाव में कमी: हंसी 'कोर्टिसोल' के स्तर को घटाती है, जिससे हृदय रोगों का खतरा कम होता है। फेफड़ों की क्षमता: ठहाका लगाकर हंसना एक गहरी श्वसन प्रक्रिया है, जिससे ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है।
हंसी दो अपरिचितों के बीच की बर्फ तोड़ने का सबसे आसान तरीका है। यह सामाजिक दूरियों को मिटाकर भाईचारा बढ़ाती है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, 'हास्य चिकित्सा' (Humor Therapy) पुराने अवसाद और मानसिक विकारों को दूर करने में सहायक है।।विश्व हास्य दिवस 2026 के अवसर पर हमें यह समझना होगा कि हंसी केवल एक विलासिता नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है। एक शांतिपूर्ण दुनिया के निर्माण के लिए परमाणु शस्त्रों से अधिक 'सकारात्मक ऊर्जा' और 'मुस्कुराहट' की जरूरत है।
सन्दर्भ : लाफ्टर योगा इंटरनेशनल - डॉ. मदन कटारिया के शोध आलेख। भरतमुनि कृत 'नाट्यशास्त्र' - हास्य रस विवेचन। विश्व स्वास्थ्य संगठन - मानसिक स्वास्थ्य और प्रसन्नता रिपोर्ट। तुलनात्मक धर्मशास्त्र - विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में आनंद का दर्शन। ,ऐतिहासिक अभिलेख - विश्व हास्य दिवस की स्थापना (1998)।


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