धर्मस्थलों को पर्यटन स्थल बनाने का विरोध, कौशलेन्द्र शर्मा ने उठाए सवाल

- “अगर धर्म ही नहीं रहेगा तो देश कैसे रहेगा?” - कौशलेन्द्र शर्मा
पटना।
गाय, गंगा और धर्म संरक्षण विषय पर आयोजित राष्ट्रवादी बहस के दौरान कौशलेन्द्र शर्मा ने सरकार द्वारा धर्मस्थलों को लगातार पर्यटन स्थल में बदलने की नीति का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान केवल इमारतों या पर्यटन से नहीं, बल्कि उसकी आस्था और सनातन संस्कृति से है।
कौशलेन्द्र शर्मा ने बहस के दौरान कहा,
“आज सरकारें धर्मस्थलों को आध्यात्मिक केंद्र के बजाय पर्यटन केंद्र बनाने में लगी हैं। मंदिरों और तीर्थों की पवित्रता धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। अगर धर्म ही नहीं रहेगा तो देश कैसे रहेगा?”
उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा धर्म और संस्कृति में बसती है तथा यदि धार्मिक स्थलों की मूल भावना कमजोर हुई तो आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से कट जाएंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि आधुनिकता और व्यावसायिक सोच के कारण धार्मिक परंपराओं को केवल पर्यटन और आर्थिक लाभ के दृष्टिकोण से देखा जा रहा है।
बहस में शामिल रमेश कुमार ने भी भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राकेश दत्त मिश्र ने किया।
डॉ. राकेश दत्त मिश्र ने चर्चा के दौरान कहा कि भारत की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए धर्मस्थलों की आध्यात्मिक गरिमा और परंपराओं का संरक्षण आवश्यक है। बहस में गाय संरक्षण, गंगा स्वच्छता, युवाओं का संस्कृति से दूर होना तथा धर्म के राजनीतिक और सामाजिक स्वरूप जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने समाज से भारतीय संस्कृति, धर्म और परंपराओं के संरक्षण के लिए जागरूक होने की अपील की।
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