भारत की रक्षा हेतु मुंबई में 17 मई को ‘श्री राजमातंगी महायज्ञ’

मुंबई - वर्तमान में विश्व पर तृतीय विश्वयुद्ध के काले बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे समय में केवल राजनीतिक अथवा बौद्धिक स्तर के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र को आध्यात्मिक आधार की भी अत्यंत आवश्यकता है। इसी उदात्त उद्देश्य से भारत को अभेद्य आध्यात्मिक सुरक्षा कवच प्राप्त हो तथा देश की सर्वांगीण प्रगति होकर पुनः एक बार ‘रामराज्य’ की स्थापना हो, इस संकल्प की पूर्ति हेतु सनातन संस्था की ओर से मुंबई में ‘श्री राजमातंगी महायज्ञ’ का आयोजन किया गया है। रविवार, 17 मई 2026 को प्रभादेवी स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर के पीछे स्थित नर्दुल्ला टैंक मैदान में दोपहर 3.30 बजे से सायं 7.30 बजे तक यह यज्ञ समारोह अत्यंत मंगलमय वातावरण में सम्पन्न होगा। यह जानकारी सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री. अभय वर्तक ने मुंबई मराठी पत्रकार संघ में आयोजित पत्रकार परिषद में दी। इस अवसर पर संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस, पुरोहित एवं ज्योतिर्विद श्री श्रेयस पिसोळकर तथा महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के नवी मुंबई समन्वयक श्री. कैलास पाटील उपस्थित थे। इस अवसर पर यह भी स्पष्ट किया गया कि यह महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि राष्ट्ररक्षा का एक आध्यात्मिक अभियान है।
इस यज्ञ के आध्यात्मिक महत्त्व को स्पष्ट करते हुए श्री. अभय वर्तक ने कहा कि,आदिशक्ति देवी सती के क्रोध से प्रकट हुई ‘दशमहाविद्याओं’ में मातंगी देवी का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। देवी मातंगी को आदिशक्ति की ‘प्रधानमंत्री’ अर्थात प्रमुख सलाहकार माना जाता है। शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने तथा प्रतिकूल परिस्थितियों पर नियंत्रण पाने के लिए इस देवी की उपासना अत्यंत फलदायी मानी जाती है। ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए उन्होंने बताया कि त्रेतायुग में प्रभु श्रीराम के अवतार काल में भी राजमातंगी देवी का तत्व कार्यरत था, जिसके कारण आदर्श रामराज्य की स्थापना संभव हुई। वर्तमान समय में भी ऐसी ही दैवी शक्ति के आशीर्वाद से भारत की रक्षा हो, यही इस यज्ञ का मुख्य उद्देश्य है।
इस महायज्ञ का सबसे बड़ा आकर्षण होगा 1 हजार वर्ष पूर्व आक्रमणकारी महमूद गजनवी द्वारा खंडित किए गए सोरटी सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य अंशों का दर्शन ! इतिहास के साक्षी ये पवित्र अवशेष यहां दर्शनार्थ रखे जाएंगे, जो श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत दुर्लभ अवसर होगा, ऐसा श्री. चेतन राजहंस ने कहा। यज्ञ का प्रारंभ महासंकल्प, श्री गणेश आवाहन और पुण्याहवाचन से होगा तथा श्री राजमातंगी देवी के मूल मंत्रों के जयघोष के बीच आहुतियां अर्पित की जाएंगी। यज्ञ का पौरोहित्य इरोड, तामिलनाडू के शिवागम विद्यानिधी आगमाचार्य श्री. अरुणकुमार गुरुमूर्ती करेंगे तथा शिवाचार्य श्री. गुरुमूर्ती हे यज्ञ मुख्य आचार्य रहेंगे, ऐसा पुरोहित एवं ज्योतिर्विद श्री. श्रेयस पिसोळकर ने बताया। इस यज्ञ में मुंबई, ठाणे, रायगढ़ और पालघर जिलों के अनेक मंदिरों के विश्वस्त एवं पुजारी सहभागी होंगे, ऐसी जानकारी महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के नवी मुंबई समन्वयक श्री. कैलास पाटील ने दी।
सनातन संस्था द्वारा अब तक 750 से अधिक यज्ञ-अनुष्ठान सम्पन्न किए जा चुके हैं। इस यज्ञ समारोह में विभिन्न क्षेत्रों के मान्यवर, संत-महंत, राज्य सरकार के मंत्री, हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के पदाधिकारी, विचारवंत, अधिवक्ता तथा उद्योजकों सहित लगभग 5 हजार श्रद्धालुओं की उपस्थिति अपेक्षित है। सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले ने जिस मुंबापुरी से धर्मकार्य का श्रीगणेश किया, उसी नगरी में आयोजित यह महायज्ञ राष्ट्रनिर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम सिद्ध होगा, ऐसा विश्वास संस्था की ओर से व्यक्त किया गया। सभी धर्मप्रेमी हिंदुओं से परिवार सहित इस समारोह में उपस्थित रहने का आवाहन श्री. अभय वर्तक ने किया है।
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