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जिंदगी का राज

जिंदगी का राज

संजय जैन

रात सुहानी होकर भी
रात उदासी से गुजरी।
था जिसका इंतजार मुझे
वो उस रात आ न सकी।
पूरी रात पीकर गुजरी
सुबह कहाँ फिर होश रहा।
मेरी जिंदगी का ये राज
बनकर राज जो रह गया।।


आज खुशी से जी रहा हूँ
वर्तमान को देख रहा हूँ।
बीती बातों को भूला कर
आज में जो जी रहा हूँ।
इसलिए जीवन साथी संग
हंसी खुशी से जी रहा हूँ।
और जिंदगी का देखो यारों
आनंद लिए जा रहा हूँ।।


पल भर में मर जाते है
और यादें छोड़ जाते है।
कौन किसके साथ आया
और कौन साथ जायेगा।
दुनिया के इस मेले में
खो मत जाना कही तुम।
इसलिए कहता है संजय
जिंदगी जी लो मस्ती से तुम।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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