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बिहार में कर संग्रह में रिकॉर्ड वृद्धि, सुशासन की बड़ी उपलब्धि

बिहार में कर संग्रह में रिकॉर्ड वृद्धि, सुशासन की बड़ी उपलब्धि

पटना | 03 अप्रैल 2026
बिहार में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कर संग्रह में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। वाणिज्य कर विभाग ने इस वर्ष कुल 43,324 करोड़ रुपये का संग्रह किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4.09 प्रतिशत अधिक है। राज्य सरकार के अनुसार यह वृद्धि बेहतर प्रशासन, डिजिटल सुधारों और कर अनुपालन में सुधार का परिणाम है।

आंकड़ों के मुताबिक, राज्य जीएसटी (GST) संग्रह में 9.20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि कुल नकद संग्रह में 10.60 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह वृद्धि राष्ट्रीय औसत 6.40 प्रतिशत से कहीं अधिक बताई जा रही है, जो बिहार की आर्थिक मजबूती की ओर संकेत करती है।
जीएसटी और आंतरिक संसाधनों में भी बढ़ोतरी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य जीएसटी संग्रह लगभग 32,801 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11.67 प्रतिशत अधिक है। वहीं, राज्य के आंतरिक संसाधनों से लगभग 56,000 करोड़ रुपये के संग्रह का लक्ष्य भी लगभग हासिल कर लिया गया है।

इसके अतिरिक्त, खनन विभाग ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए 3,592 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया है।
सरकार ने बताया-सुशासन और सुधारों का परिणाम

भाजपा के बिहार प्रवक्ता नीरज कुमार ने इस उपलब्धि को राज्य में सुशासन और पारदर्शी व्यवस्था का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग से बिहार लगातार आर्थिक प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में बुनियादी ढांचे—जैसे सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य—में सुधार हुआ है, जिससे निवेश का माहौल बेहतर बना है और कर आधार का विस्तार हुआ है।

विपक्ष पर निशाना, विकास पर जोर

नीरज कुमार ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि पूर्व के शासनकाल में राज्य की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, जबकि वर्तमान में बिहार तेजी से विकसित हो रहे राज्यों की श्रेणी में शामिल हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस विकास, रोजगार और सुशासन पर है, और बढ़ता कर संग्रह राज्य की योजनाओं को और मजबूती देगा।
आर्थिक मजबूती की ओर बढ़ता बिहारसरकार का दावा है कि कर संग्रह में यह वृद्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता का संकेत है। आने वाले समय में यह रुझान बिहार को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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