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राजा जनक जान थी जानकी

समस्त माताओं बहनों एवं बंधुओं को सपरिवार जानकी नवमी की हार्दिक बधाई एवं बहुत बहुत शुभकामनाऍं । माता जानकी नवमी के उपलक्ष्य में एक छोटी सी रचना का सादर प्रयास :

राजा जनक जान थी जानकी ,

अरुण दिव्यांश
विधि का विधान थी जानकी ,
जनकपुर की अरमान जानकी ,
बिहारी नारी महान थी जानकी ।
जिस धरा से निकली थी सीता ,
बिहार का पुनौरा वह धाम है ,
था जनकपुर भी तब बिहार में ,
तब ससुराल यही था राम की ।
रावण जान का कारण जानकी ,
हनुमान मिलन कारण जानकी ,
माता शबरी का उद्धार जानकी ,
राम का सच्चा ये प्यार जानकी ।
जनक जनकपुर मिथिला नगरी ,
जहाॅं फुटा था ये रक्त की गगरी ,
जहाॅं चलाया था जनक ने हल ,
गरज गरजकर बरसा था बदरी ।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
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