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‘डॉ. तारा सिंह इंटरनेशनल अवार्ड’ से सम्मानित हुए इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक

‘डॉ. तारा सिंह इंटरनेशनल अवार्ड’ से सम्मानित हुए इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक

मुंबई/अरवल (बिहार)। साहित्य और इतिहास के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले बिहार के गौरव, प्रख्यात इतिहासकार एवं साहित्यकार सत्येन्द्र कुमार पाठक को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया है। मुंबई की सुप्रसिद्ध संस्था ‘स्वर्ग विभा’ द्वारा आयोजित भव्य समारोह में उन्हें ‘डॉ. तारा सिंह इंटरनेशनल अचीवमेंट अवार्ड 2026’ एवं ‘स्वर्ग विभा अवार्ड’ प्रदान किया गया।

जहानाबाद (वर्तमान अरवल जिला) के करपी के मूल निवासी सत्येन्द्र कुमार पाठक को यह सम्मान उनके गहन ऐतिहासिक अध्ययन, सृजनात्मक लेखन और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया। संस्था ने उनके कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से भारतीय संस्कृति की जड़ों को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

🌟 विद्वानों एवं गणमान्य लोगों ने दी शुभकामनाएं

इस अवसर पर देश की कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने श्री पाठक को बधाई दी:-

  • डॉ. बी. डी. सिंह (निदेशक, स्वर्ग विभा) ने इसे संस्था के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया
  • आचार्य डॉ. धर्मेंद्र (राष्ट्रीय अध्यक्ष, आचार्यकुल एवं पूर्व कुलपति) ने उनके शोध कार्यों की सराहना की
  • डॉ. ऊषा किरण श्रीवास्तव (अध्यक्षा, स्वर्णिम कला केंद्र) एवं डॉ. संगीता सागर ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की
  • वी. के. दुबे (सांस्कृतिक मंत्री, मुंबई हिंदी विद्यापीठ) सहित कई वरिष्ठ साहित्यकारों और पत्रकारों ने शुभकामनाएं प्रेषित कीं
  • डॉ. राकेश दत्त मिश्र (संपादक, दिव्य रश्मि) ने भी इस उपलब्धि को बिहार और साहित्य जगत के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए हार्दिक बधाई दी

🌿 क्षेत्र में खुशी की लहर

अरवल और जहानाबाद क्षेत्र में इस उपलब्धि को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सत्येन्द्र कुमार पाठक ने न केवल जिले का नाम रोशन किया है, बल्कि युवाओं के लिए साहित्य और इतिहास के प्रति नई प्रेरणा भी जगाई है।

✍️ गौरव का क्षण


यह सम्मान केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत, साहित्य और इतिहास के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
“डॉ. तारा सिंह इंटरनेशनल अवार्ड” से सम्मानित होना सत्येन्द्र कुमार पाठक की वर्षों की साधना, शोध और सृजनात्मक प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है।

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