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नालंदा घटना पर माया श्रीवास्तव का बयान: दोषियों को मिले कठोर सजा, चयनात्मक संवेदनशीलता पर उठाए सवाल

नालंदा घटना पर माया श्रीवास्तव का बयान: दोषियों को मिले कठोर सजा, चयनात्मक संवेदनशीलता पर उठाए सवाल

पटना/नालंदा:
“समर्थ नारी समर्थ भारत” की राष्ट्रीय सह संयोजिका (बिहार, झारखंड एवं पश्चिम बंगाल प्रभारी) श्रीमती माया श्रीवास्तव ने नालंदा में हाल ही में सामने आई महिला उत्पीड़न की घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आज के सुशासन के दावों के बीच खुलेआम दरिंदगी की घटनाएं सामने आ रही हैं, जो बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पूर्व मणिपुर से सामने आए वीभत्स वीडियो ने पूरे देश और दुनिया को झकझोर दिया था, और अब नालंदा—जो मुख्यमंत्री का गृह जिला है—से आई घटना उसी भयावहता की याद दिलाती है। उनके अनुसार, ऐसा प्रतीत होता है कि इतिहास खुद को दोहरा रहा है।
माया श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि जिन प्रदेशों में भाजपा या सहयोगी दलों की सरकार है, वहां महिलाओं के साथ इस तरह की घटनाएं आम होती जा रही हैं। बिहार में “डबल इंजन सरकार” होने के बावजूद कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना प्रदेश में “गुंडाराज” की स्थिति को दर्शाती है, जहां अपराधियों और बलात्कारियों को पुलिस-प्रशासन से खुली छूट मिलती दिख रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि नालंदा की घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि यह समाज की सोच और संवेदनशीलता का आईना है। पीड़िता अतिपिछड़ा समाज से आती है और आरोपियों का किसी प्रभावशाली जाति या धार्मिक पहचान से जुड़ाव नहीं है, जिसके कारण इस मामले को अपेक्षित राजनीतिक और मीडिया महत्व नहीं मिल पा रहा है।
माया श्रीवास्तव ने सवाल उठाया कि क्या अब किसी घटना की गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि वह किसी खास नैरेटिव में फिट बैठती है या नहीं। उन्होंने कहा कि जब कोई मामला किसी एजेंडे के अनुकूल होता है तो वह राष्ट्रीय बहस बन जाता है, लेकिन अन्य मामलों में चुप्पी साध ली जाती है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि कानूनी प्रक्रिया और अदालतों के निर्णय महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सबसे जरूरी है कि पीड़िता को समय पर, निष्पक्ष और सख्त न्याय मिले। समाज को हर घटना को समान दृष्टि से देखने की जरूरत है, न कि उसे जाति, धर्म या राजनीति के तराजू पर तौलने की।अंत में “समर्थ नारी समर्थ भारत” ने सरकार से मांग की है कि नालंदा के दोषियों को कठोर से कठोर सजा दी जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के अपराध करने से पहले लोग कई बार सोचें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो इस मामले में सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठ सकते हैं।
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