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शस्त्र-शास्त्र चिन्मयता संग, उग्र आवेश अपार

(परशुराम जयंती — 2026)

शस्त्र-शास्त्र चिन्मयता संग, उग्र आवेश अपार

कुमार महेंद्र
नयन छवि अद्भुत, अनुपम,
पावक संग मनमोहक श्रृंगार।
माता रेणुका, पिता जमदग्नि,
वंदन श्रीहरि षष्ठ अवतार।
कर-कमल शोभित शस्त्र-शास्त्र,
सत्य-सत्व व्यक्तित्व अनूप सार।
शस्त्र-शास्त्र चिन्मयता संग, उग्र आवेश अपार।।


त्रिलोक अविजित उपमा,
आह्वान-स्तुति शीघ्र फलकारी।
असाधारण ब्राह्मण-पर्याय,
पितृ-वचन हित आज्ञाकारी।
कर जननी का शीश पृथक,
पुनःस्थापन काज साकार।
शस्त्र-शास्त्र चिन्मयता संग, उग्र आवेश अपार।।


क्षणिक धैर्य कदापि नहीं,
दर्श कर आस-पास अनीति।
एक भुजा मृगछाल शोभित,
दूसरी मनमोहक उपवीत।
क्रोधाग्नि अनुपम दहक,
कंपित धरा, व्याप्त हाहाकार।
शस्त्र-शास्त्र चिन्मयता संग, उग्र आवेश अपार।।


सहस्त्रार्जुन परम शत्रु,
मैत्री-उद्गम स्नेहिल स्पर्श।
परशु-संज्ञा शिव-कृपा-प्रसाद,
हर पल तत्पर तार्किक विमर्श।
कोटि वंदन भृगुकुल-भूषण विप्र,
अंतर-सरित नित मंगल-धार।
शस्त्र-शास्त्र चिन्मयता संग, उग्र आवेश अपार।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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