लव वाइब्स : एक मृदुल अनुभूति
कुमार महेंद्रमन-आकाश में जब से तुमने,
चुपके से डेरा डाला है।
हर दिशा में एक मधुर गूँज,
प्रेम-सुगंध का फैला उजाला है।
तेरी स्मृतियों की छाया में,
सहज चेतना में स्पर्श-सी अनुरक्ति।
लव वाइब्स, एक मृदुल अनुभूति।।
तेरे नयन—निभृत सरोवर जैसे,
गहराई में अथाह कथाएँ।
उनमें झाँकूँ तो लगता है,
सारी सृष्टि वहीं सिमट आए।
तेरी वाणी की सरगम में,
वीणा-सी लय-अभिव्यक्ति।
लव वाइब्स, हृदय की मृदुल अनुभूति।।
तू स्पर्श नहीं, एक अहसास है,
जो आत्मा तक उतर रही।
तेरे होने की मृदुल आहट,
जीवन को सुरभित कर रही।
न दूरी का कोई बंधन अब,
न समय की कोई परिधि।
लव वाइब्स, हृदय की मृदुल अनुभूति।।
हृदय-वीणा के हर एक तार पर,
तेरा ही मधुर गान सजा है।
जीवन के इस शांत सागर में,
प्रणय-मय संगीत बजा है।
लव वाइब्स केवल तरंग नहीं,
यह प्रिय मिलन की मधुर स्तुति।
लव वाइब्स, हृदय की मृदुल अनुभूति।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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