स्वाभिमान साहित्यिक मंच का 44वां राष्ट्रीय कवि दरबार: कविता और ग़ज़लों का अद्भुत संगम

स्वाभिमान साहित्यिक मंच द्वारा आयोजित 44वां ऑनलाइन राष्ट्रीय कवि दरबार साहित्य प्रेमियों के लिए यादगार बन गया। देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े कवियों ने अपनी उत्कृष्ट कविताओं और ग़ज़लों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। यह आयोजन न केवल रचनात्मक अभिव्यक्ति का मंच बना, बल्कि साहित्यिक संवाद और संवेदना का सशक्त माध्यम भी साबित हुआ।
कार्यक्रम का संयोजन पटियाला के नरेश कुमार आष्टा ने किया, जबकि अध्यक्षता अररिया (बिहार) के डॉ. अनुज प्रभात ने की। मंच संचालन की जिम्मेदारी जागृति गौड़ (पटियाला) ने संभाली, जिन्होंने अपने सधे हुए संचालन और प्रभावशाली शायरी से पूरे कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा।
कार्यक्रम की शुरुआत दिवंगत पार्श्वगायिका आशा भोसले को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए हुई। संचालिका जागृति गौड़ ने अपनी भावपूर्ण पंक्तियों— “वो सुरों से अपने, कायनात को महका दें, उनकी आवाज़ की मिठास हर दिल को धड़का दे” —के माध्यम से उन्हें नमन किया। इसके पश्चात उपस्थित सभी कवियों ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए।
राष्ट्रीय कवि दरबार में कई प्रतिष्ठित रचनाकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। पटना (बिहार) के सिद्धेश्वर ने दोस्ती और विश्वास पर आधारित अपनी रचना से श्रोताओं का मन जीता। सोजत सिटी (राजस्थान) के डॉ. रशीद गौरी ने प्रेम और बदलते सामाजिक परिवेश पर विचारोत्तेजक पंक्तियां प्रस्तुत कीं। नई दिल्ली के संतोष पुरी ने युद्ध की विभीषिका को दर्शाती कविता से वातावरण को गंभीर बना दिया।
इसी क्रम में छत्तीसगढ़ की संपत्ति चौरे ‘स्वाति’ ने जीवन की संवेदनाओं को शब्दों में पिरोया, जबकि सतोष मालवीय ने जीवन की जटिलताओं को अपनी शैली में अभिव्यक्त किया। पुणे के नंद कुमार आदित्य ने भगवान परशुराम जयंती के अवसर पर अपनी विशेष रचना प्रस्तुत की। मध्य प्रदेश के सागर से दिव्यांजलि सोनी ‘दिव्या’ ने अपनी ग़ज़ल “यादों की स्याही में भर कलम” के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष डॉ. अनुज प्रभात ने सभी कवियों की प्रस्तुतियों पर अपने स्पष्ट और प्रेरणादायक विचार रखते हुए रचनाकारों का उत्साहवर्धन किया। वहीं संचालिका जागृति गौड़ ने अपने प्रभावशाली संचालन और मधुर शायरी से पूरे आयोजन को ऊर्जावान बनाए रखा।
यह कार्यक्रम “स्वाभिमान साहित्य” यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारित किया गया, जिससे देशभर के साहित्य प्रेमियों ने इसमें भागीदारी निभाई।कुल मिलाकर, स्वाभिमान साहित्यिक मंच का 44वां राष्ट्रीय कवि दरबार कविता और ग़ज़लों का ऐसा संगम रहा, जिसने साहित्य की विविधता, संवेदनशीलता और रचनात्मकता को एक साथ मंच पर साकार कर दिया।
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