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अन्तर्मन

अन्तर्मन

डॉ.अंकेश कुमार
पल पल दीपक सा जलता है,
वहीं उजाला भी पलता है।
चीर अंधेरों को निकला वह
भाव भरा है मन में।
तू मुझमें, मैं तुझमें।
तेरी सुगंध, तेरा अतीत
तेरी आशाएं ,तेरा वो प्रीत
तेरा हृदय है मधुवन मेरा
बसता है ,इस मन में
तू मुझमें, मै तुझमें।
तेरे स्वप्न क्रांति के शंख,
नाद कर रहे हैं, असंख्य।
जिजीविषा के द्वंद्व में रहकर
समर बना कण कण में
तू मुझमें , मैं तुझमें।
डॉ.अंकेश कुमार,पटना (बिहार) की ओर से आप सभी हृदय वासी को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं
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