तुमको याद करते हैं
अरुण दिव्यांश
निज को आबाद करते हैं ,
जब तुमको याद करते हैं ।
बदनाम न करे कोई हमें ,
बस जमाने से ही डरते हैं ।।
सीने में लपट अग्नि की है ,
हम स्वयं से ही लड़ते हैं ।
गिला करता कोई तुम्हारी ,
मुॅंह पर थप्पड़ जड़ते हैं ।।
सब कहे हम तुमपे मरते ,
बेवफाई ही सब करते हैं ।
दूर रहे पहले से जो थे ,
सूखी सहानुभूति भरते हैं ।।
फिर भी सबसे चोरी चोरी ,
याद तुम्हें किया करते हैं ।
भयभीत होता दुनिया से ,
फिर भी तुम्हें ही वरते हैं ।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें|
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