माता जानकी
अरुण दिव्यांशजनक जी के जिया बानी ,
माई धरती के धिया बानी ,
श्रीराम जेकर पिया बानी ,
हाॅं हाॅं हम त सिया बानी ।
जनकपुर के चिड़िया बानी ,
त्रेता के हम तिरिया बानी ,
बिहार के बेटी यूपी के बहू ,
श्रीरामजी के पिरिया बानी ।
ब्रह्मांड के हम शून्य बानी ,
पुनौरा के हम पुण्य बानी ,
बिहार के हम बानी हाड़ ,
शक्ति में हम परिपूर्ण बानी ।
श्रीराम हमर बानी बिष्णु ,
हम त उनकर रिया बानी ,
श्रीरामजी हमर बानी करम ,
हम त उनके किरिया बानी ।
जनकजी के जान जानकी ,
अयोध्या बहू अभिमान की ,
जय बिहार पुनौरा धाम की ,
मात लव कुश हनुमान की ।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
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