“पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष पर भारत की गहरी चिंता, शांति और कूटनीति की अपील: डॉ. एस. जयशंकर”

- विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का "पश्चिम एशिया की स्थिति" पर राज्यसभा में स्वत: संज्ञान वक्तव्य (09 मार्च, 2026)
नई दिल्ली
आदरणीय सभापति जी,
मैं इस सम्मानित सभा को पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों से अवगत कराना चाहता हूं, जो हम सभी के लिए गहरी चिंता का कारण हैं। जैसा कि माननीय सदस्य जानते हैं, संघर्ष का यह दौर 28 फरवरी, 2026 को आरंभ हुआ था। हम न केवल एक तरफ इजरायल और अमेरिका और दूसरी तरफ ईरान के बीच की लड़ाई, बल्कि कई खाड़ी देशों पर हमले भी देख रहे है। ईरान में नेतृत्व स्तर के साथ-साथ क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विध्वंस सहित कई हताहत हुए हैं।
2. आरंभ में ही, सरकार ने 28 फरवरी को एक वक्तव्य जारी कर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की थी और सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ने से बचने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था। हमारा मानना था और हम विश्वास करते हैं कि तनाव कम करने और अंतर्निहित मुद्दों को हल करने के लिए बातचीत और कूटनीति को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। महोदय, यह भी आवश्यक है कि इस क्षेत्र के सभी राज्यों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाए।
3. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, माननीय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में 01 मार्च को सुरक्षा मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) की बैठक हुई। बैठक में ईरान में हुए हवाई हमलों और उसके बाद कई खाड़ी देशों में हुए हमलों के बारे में जानकारी दी गई। सीसीएस क्षेत्र में भारतीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए निहितार्थों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। समिति को इस क्षेत्र से गुजरने वाले भारतीय यात्रियों और इन देशों में निर्धारित परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों के सामने आने वाली कठिनाइयों से अवगत कराया गया। बैठक में सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों को इन समस्याओं से निपटने के लिए उचित उपाय करने का निर्देश दिया गया। माननीय प्रधानमंत्री उभरते घटनाक्रमों की गहनतापूर्वक निगरानी कर रहे हैं और संबंधित मंत्रालय प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए परस्पर समन्वय कर रहे हैं।
4. संघर्ष में निरंतर तेजी बनी हुई है और क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति अत्यंत खराब हो गई है। हमने देखा है कि, वास्तव में, संघर्ष बढ़ते विध्वंस और मौतों के साथ अन्य देशों में फैल गया। पूरे क्षेत्र में सामान्य जीवन और आर्थिक कार्यकलाप स्पष्ट रूप से प्रभावित हैं और कुछ मामलों में गतिविधियां ठप हो गई हैं। इसलिए, हमने 03 मार्च को बातचीत और कूटनीति के लिए अपने आह्वान को दोहराया और संघर्ष को शीघ्र समाप्त करने के लिए बात की। मुझे विश्वास है कि यह सभा जानमाल के नुकसान पर दुख व्यक्त करने में मेरे साथ है।
5. माननीय सभापति महोदय, हालांकि कोई भी घटनाक्रम जो विश्व में शांति और सुरक्षा को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है, वह बहुत परेशान करने वाला है, लेकिन यह जारी संघर्ष भारत के लिए विशेष चिंता का विषय है। हम एक पड़ोसी क्षेत्र हैं और स्पष्ट रूप से यह हमारे हित में है कि पश्चिम एशिया स्थिर और शांतिपूर्ण बना रहे। खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते हैं और काम करते हैं। ईरान में भी कुछ हजार भारतीय हैं जो पढ़ाई या रोजगार के लिए वहां हैं। यह क्षेत्र हमारी ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है और इसमें तेल और गैस के कई महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता शामिल हैं।
6. सभापति महोदय, खाड़ी देश हमारे प्रमुख व्यापारिक साझीदार भी हैं। यह व्यापार सालाना लगभग 200 बिलियन डालर का है। सभा को इस बात की भी जानकारी है कि पिछले दशक में इस क्षेत्र से भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण निवेश हुआ है। इसलिए, आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े व्यवधान और अस्थिरता का माहौल हमारे लिए गंभीर मुद्दे हैं। इसके अतिरिक्त, इनमें मर्चेंट शिपिंग पर हमले शामिल हैं जहां भारतीय नागरिक अक्सर चालक दल का एक बड़ा हिस्सा होते हैं। दुख की बात है कि हम पहले ही दो भारतीय नाविकों को खो चुके हैं और इस तरह की घटनाओं में एक लापता है। मैं जानता हूं कि सभा उनके निधन पर शोक व्यक्त करने में मेरे साथ है।
7. माननीय सभापति महोदय, जून 2025 में 12 दिनों के युद्ध के बाद से सरकार लगातार पश्चिम एशिया की स्थिति का आकलन कर रही है। हमने बढ़ते तनाव के संकेतों को नोट किया और इसी के अनुरूप ईरान में भारतीय समुदाय को सावधान किया। 5 जनवरी 2026 को, विदेश मंत्रालय द्वारा भारतीय नागरिकों को ईरान की अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई थी। जो लोग पहले से ही वहां रह रहे हैं, उनसे दूतावास में पंजीकरण कराने, उचित सावधानी बरतने और दूतावास की वेबसाइट और सोशल मीडिया हैंडल की निगरानी करने का आग्रह किया गया। 14 जनवरी, 2026 को एक दूसरी एडवाइजरी जारी की गई थी, जिसमें और भी स्पष्ट शब्दों में यात्रा से बचने की सलाह दी गई थी। जहाजरानी महानिदेशालय मुंबई ने समानांतर रूप से 14 जनवरी, 2026 को भारतीय नाविकों के लिए अपनी एडवाइजरी जारी कर उन्हें दूतावास की सलाह का पालन करने और तट पर अनावश्यक आवाजाही से बचने के लिए कहा। भर्ती और शिपिंग कंपनियों को भी कहा गया था कि वे भारतीय नाविकों को ईरान में तैनात न करें या न भेजें।
8. महोदय, उभरती स्थिति के हमारे आकलन को दर्शाते हुए, तेहरान में भारतीय दूतावास ने 14 फरवरी, 2026 को एक और एडवाइजरी जारी की, जिसमें छात्रों, तीर्थयात्रियों, व्यापारियों और पर्यटकों सहित भारतीय नागरिकों से वाणिज्यिक उड़ानों सहित परिवहन के सभी उपलब्ध साधनों से ईरान छोड़ने का आग्रह किया गया। उन्हें किसी भी सहायता के लिए दूतावास से संपर्क करने के लिए कहा गया और 24x7 हेल्पलाइन प्रदान की गई। 23 फरवरी को एक अन्य एडवाइजरी के माध्यम से इसे फिर से कड़े शब्दों में दोहराया गया। कुछ ने इन सलाहों पर ध्यान दिया और देश छोड़ दिया; हालांकि, कई अन्य लोगों ने उनकी अवहेलना की और ईरान में बने हुए हैं। हम अपने मछुआरों के संपर्क में भी हैं जो ईरान से बाहर काम करते हैं। 28 फरवरी 2026 तक यही स्थिति थी।
9. संघर्ष शुरू होने के बाद, भारतीय दूतावास ने तेहरान में कई भारतीय छात्रों को तेहरान के बाहर के स्थानों पर स्थानांतरित करने की सुविधा प्रदान की है। आपातकालीन संपर्क हेल्पलाइन के साथ एक एडवाइजरी अपडेट 3 मार्च 2026 को जारी किया गया था। इसी तरह, तीर्थयात्रियों को उनके आंतरिक आवागमन के लिए सुविधा प्रदान की गई थी। भारतीय नागरिक जो व्यावसायिक कारणों से ईरान में थे, उन्हें आर्मेनिया जाने और घर लौटने में सहायता प्रदान की गई। तेहरान में दूतावास पूरी सक्रियता - वास्तव में उच्चतम अलर्ट - के साथ काम कर रहा है। वे इस कठिन क्षण में भारतीय समुदाय की मदद करने और उन भारतीय नागरिकों की सहायता करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं जो अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं को पार करना चाहते हैं। जहां तक नाविकों का सवाल है, जहाजरानी महानिदेशालय ने 2 मार्च को एक आदेश के माध्यम से तत्काल प्रतिक्रिया, समन्वय और सहायता कार्यों के लिए एक त्वरित प्रतिक्रिया दल का गठन किया है। यह 24x7 आधार पर काम करेगा।
10. माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से सदन को यह भी सूचित करना चाहूंगा कि इस क्षेत्र में प्रत्येक भारतीय दूतावास ने इसी तरह एडवाइजरी जारी की है। इजराइल में दूतावास ने 28 फरवरी और 01 मार्च को, यूएई ने 28 फरवरी और 05 मार्च को, बहरीन ने 28 फरवरी को, कतर ने 28 फरवरी और 05 मार्च को, कुवैत ने 28 फरवरी और 05 मार्च को, सऊदी अरब ने 28 फरवरी और 08 मार्च को, ओमान ने 28 फरवरी और 05 मार्च को ऐसा किया था। विदेश मंत्रालय ने स्थिति की निगरानी करने और प्रभावित लोगों के साथ-साथ उनके परिवारों के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए एक समर्पित विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। विदेश मंत्रालय का नवीनतम अपडेट 07 मार्च को जारी किया गया था।
11. हमारे राजनयिकों ने दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे केंद्रों में फंसे ट्रांजिट यात्रियों की सहायता के लिए भी कड़ी मेहनत की है। उन्होंने भारतीय नागरिकों के लिए अंतर्राष्ट्रीय सीमा पार करने की सुविधा प्रदान की है, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात से ओमान और कतर, कुवैत और बहरीन से सऊदी अरब तक शामिल हैं। जहां कहीं भी हवाई क्षेत्र को आंशिक रूप से खोला गया है, हमने भारतीय यात्रियों की वापसी को सक्षम बनाने के लिए गैर-अनुसूचित उड़ानों सहित वाणिज्यिक उड़ानों को मंजूरी दी है। हमारा अनुमान है कि कल तक हमारे लगभग 67,000 नागरिकों ने इस सुविधा का उपयोग किया है। महोदय, आज मुझे नागर विमानन मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के बारे में सूचित किया गया है जिसमें हमें सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में बताया गया है; भारतीय वाहकों द्वारा संचालित 51 विमान 07 तारीख को भारत पहुंचे। 08 तारीख को ऐसे 49 विमान पहुंचे और 09 तारीख को ऐसे 50 विमान निर्धारित हैं। इसलिए, मैं सभा को आश्वस्त करना चाहता हूं कि जो लोग इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जो ट्रांजिट यात्री हैं, जिन्हें इस क्षेत्र से तत्काल वापस आने की आवश्यकता है, हम उनके लिए ऐसा करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
12. सभापति महोदय, इस अवधि के दौरान, सरकार ने संबंधित देशों के साथ निकट संपर्क बनाए रखा। माननीय प्रधानमंत्री जी ने स्वयं संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति, कतर के अमीर, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस, कुवैत के क्राउन प्रिंस, बहरीन के राजा, ओमान के सुल्तान, जॉर्डन के शाह और इजराइल के प्रधानमंत्री से बात की है। प्रत्येक मामले में, हमें आश्वासन मिला कि भारतीय समुदाय की भलाई मेजबान सरकार के लिए प्राथमिकता होगी। मैं इसी तरह इन देशों में अपने समकक्षों के साथ निकट संपर्क में रहा हूं। जहां तक अमेरिका का संबंध है, हमने राजनयिक चैनलों के माध्यम से नियमित संपर्क बनाए रखा है। हालांकि प्रयास किए गए हैं, पर इस समय नेतृत्व स्तर पर ईरान के साथ संपर्क स्पष्ट रूप से कठिन है। यद्यपि, मैंने 28 फरवरी और 5 मार्च 2026 को उनके विदेश मंत्री अरागची से बात की है। हम आने वाले दिनों में इन उच्च-स्तरीय वार्तालापों को जारी रखेंगे।
13. महोदय, सदन को एक ईरानी जहाज के मुद्दे में भी दिलचस्पी होगी जो वर्तमान में कोच्चि में डॉक किया गया है। ईरानी पक्ष ने 28 फरवरी को इस क्षेत्र में तीन जहाजों को हमारे बंदरगाहों पर डॉक करने की अनुमति देने का अनुरोध किया। अनुमति 01 मार्च को प्रदान कर दी गई थी। आइरिस लावन वास्तव में 04 मार्च को कोच्चि में डॉक किया गया था। चालक दल वर्तमान में भारतीय नौसेना सुविधा केंद्रों में है। हमारा मानना है कि यह सही काम था और ईरानी विदेश मंत्री ने इस मानवीय भंगिमा के लिए अपने देश की तरफ से धन्यवाद व्यक्त किया है।
14. माननीय सभापति महोदय, हमारी ऊर्जा सुरक्षा पर इस संघर्ष के प्रभाव को देखते हुए, मैं उस विशेष चिंता की ओर भी ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं। सरकार ऊर्जा बाजारों की जवाबदेही, लागत और जोखिमों को पूरी तरह से ध्यान में रखते हुए इसे सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारे लिए, भारतीय उपभोक्ता के हित हमेशा प्रमुख प्राथमिकता रहे हैं और रहेंगे। जहां कहीं आवश्यक हो, भारतीय कूटनीति ने इस अस्थिर स्थिति में हमारे ऊर्जा उद्यमों के प्रयासों में सहायता की है।
15. माननीय सभापति महोदय, मैं अपने दृष्टिकोण के तीन मार्गदर्शक कारकों पर प्रकाश डालते हुए अपनी बात समाप्त करना चाहता हूं:
(i) भारत शांति के पक्ष में है और बातचीत एवं कूटनीति की ओर लौटने का आग्रह करता है। हम तनाव कम करने, संयम रखने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के पक्षधर हैं।
(ii) इस क्षेत्र में भारतीय समुदाय की भलाई और सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। हम इस दिशा में क्षेत्र की सरकारों के साथ काम करना जारी रखेंगे।
(iii) ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार प्रवाह सहित हमारा राष्ट्रीय हित हमेशा सर्वोपरि रहेगा।
16. मुझे विश्वास है कि सरकार को इस मामले में इस महती सभा का पूरा समर्थन प्राप्त है। धन्यवाद।
09 मार्च, 2026 नई दिल्ली
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