चंद उदासियाॅं
अरुण दिव्यांशचंद उदासियाॅं बॅंट जाऍंगी ,
चंद उदासियाॅं छॅंट जाऍंगी ,
उदासी देख उदास न हो ,
चंद उदासियाॅं कट जाऍंगी ।
चेहरे की हैं जो उदासियाॅं ,
चिंता की होती हैं दासियाॅं ,
उम्र पर बना लेती है घर ,
स्वास्थ्य पर नक्काशियाॅं ।
मत बन दास उदासी के ,
मन से हटा नाम दासी के ,
ले नाम काशी वासी के ,
न बन दास उपहासी के ।
उदास का एहसास कर ,
शीघ्र इसका उपहास कर ,
शीघ्र कर उद्देश्य तू पूरा ,
उद्देश्य को न उदास कर ।
उदास का तू परिहास कर ,
जीवन को न निराश कर ,
जीवन में अब तू आस भर ,
जीवन में अब प्रकाश भर ।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
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