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प्रतिक्रियाएँ दीजिये

प्रतिक्रियाएँ दीजिये

बिना कारण के भी हम
बहुत वदनाम हो रहे है।
जबकि हमारी कोई खता नही
फिर भी दोष हम पर लगा रहे।।

उम्मीदें जिंदगी की लेकर हम
आज कल हम जो चल रहे है।
उसमें सभी को खुश रख पाना
आज के युग में संभव नही है।।

सरहाना आलोचना करना जरूरी है
हर विषय पर बोलना भी जरूरी है।
मौन सहमति देना मुर्दो की तरह है
इसलिए जिंदा दिली से बात बोले।।

लेखक कवि तब तक ही जिंदा है
जब तक उसकी आलोचना न हो।
उसके लेख गीत कविता पर अपनी
प्रतिक्रियाएँ अच्छी बुरी जरूर दीजिये।
जिससे वो अपनी लेखनी आदि को
लोगों के दिलों में जिंदा रख सके।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन " बीना" मुंबई
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