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ऐसा भी होता है

ऐसा भी होता है

संजय जैन
गुजरी है जिंदगी जो
तेरे इश्क में जो।
बेदाग बना रहा जो
तेरे ही प्यार में जो।
चाहत मेरी बड़ी जो
मिलते रहने से जो।
आदत सी हो गई जो
रोज मिलने की जो।।


पल भर भी ओझल
आँखो से मत होना।
दिल की बातों को
बस दिल से समझना।
जो कुछ भी हुआ है
तेरी मेरी क्या खता है।
सच कहें हम तो
दो जान एक हुये है।।


जिंदगी की जुदाई देखो
अब सही नही जाती।
उनके बिना जिंदगी अब
बिल्कुल जीये नही जाती।
कल तक जो साथ थे
तो जिंदगी खिली-खिली थी।
क्योंकि प्यार की डोर से
हम दोनों जो बंधे थे।।


हमारे दोस्त और घर वाले
आज कल बहुत दुखी है।
हम दोनों के बिछड़ने का
सबसे ज्यादा गम उन्हें है।
किसी की गलतियों का
परिणाम ये निकला है।
इसका अब तक पता
किसी को नही चला है।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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