“चालाक बिल्ली”
✍️ डॉ. रवि शंकर मिश्र "राकेश"""""""""""""""""""""""""""""""""""
नन्ही-सी आँखों में चमक निराली,
होती उजली, चित्ती और काली।
छत पर कूदे, आँगन में आए,
दूध की खुशबू पाते ही मुस्काए।
पंजों में जैसे रेशम सी नरमी,
चलती ऐसे मानो हवा हो थमी।
चूहे देखे तो बन जाए शिकारी,
फुर्ती ऐसी, पड़ती सब पर भारी।
कभी-कभी वो बनती है रानी,
गले में जैसे अदृश्य कहानी।
म्याऊँ-म्याऊँ करके जताती प्यार,
बच्चों को लगता है डर अपार।
रात में उसकी आँखें चमकती,
जैसे दो दीपक धीमे-धीमे दमकती।
चुपके-चुपके शिकार को देखे,
घात लगाकर चूहों को छेके।
नटखट, चंचल, थोड़ी सयानी,
घर घर की वो जानती पूरी कहानी।
बिल्ली नहीं, है वो मासी हमारी,
नाखून लगे तो फैलती बीमारी।। 17.03.2026हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ , https://www.facebook.com/divyarashmimag


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