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धर्म बना व्यापार

धर्म बना व्यापार

संजय जैन

कभी राम को भजते है।
कभी श्याम को जपते है।
इरादा नेक अगर हो तो।
दोनों को क्यों भजना पड़े।।


नाम तो राम का लेना है।
गला फिर सबका काटना है।
राम तो बस एक बहाना है।
असल में घरों में घुसना है।।


धर्म की आड़ लेकर ही।
लोगों को छल सकते है।
बाबा और महाराज बनकर।
चंदे से करोड़पति बनते है।।


कथाएँ करने के अब तो।
बाबा लाखों रुपीया लेते है।
जो कल तक नि:शुल्क करते थे।
और अपना धर्म समझते थे।।


आज कल धर्म भी देखो।
एक बड़ा व्यापार बन गया।
पूजा-पाठ आदि करने के।
लाखों की मांग करने लगे।
और बाबा से देखो कैसे
लाला आज कल बन गये।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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