हिमालय भी छोटा लगता,एक शहीद के कद से
कुमार महेंद्रराष्ट्र रक्षा सेवा जीवन ध्येय,
हर सांस अंतर भारती वंदन ।
कदम चाल शौर्य शक्ति_पुंज,
रग रग जोश उत्साह स्पंदन ।
अष्ट प्रहर सजग सीमा सुरक्षा,
चित्त सराबोर देश प्रेम_मद से ।
हिमालय भी छोटा लगता,एक शहीद के कद से ।।
कर्तव्य परायण शिष्ट छवि,
दिनचर्या चुस्ती फुर्ती सराबोर ।
ज्ञान ध्यान संस्कृति संस्कार,
ओजस्वी भविष्य प्रेरक भोर ।
हृदय बिंदु इतिहास पैनोरमा,
प्रेरणा साहसी वृतांत वद से ।
हिमालय भी छोटा लगता,एक शहीद के कद से ।।
मातृभूमि सेवा हित तत्पर,
निशि दिन वंदनीय प्रयास ।
निहार तिरंगी गौरव पताका,
हिय हिलोर उमंग उल्लास ।
नाप भांप शत्रु रणनीतियां,
विजयश्री प्रहार जद से ।
हिमालय भी छोटा लगता,एक शहीद के कद से ।।
मात पिता भार्या संतति सहन,
अथाह क्रंदन विछोह वेदना ।
अश्रुरित मित्र मंडली परिवेश,
जन्म धरा पटल नव चेतना ।
कोटि कोटि साष्टांग नमन,
सदा स्तुति देव तुल्य पद से ।
हिमालय भी छोटा लगता,एक शहीद के कद से ।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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