परंपरा, संस्कार और आशीर्वाद का संगम - “उपनयन एवं मुंडन संस्कार”

दिव्य रश्मि के उपसम्पादक जितेन्द्र कुमार सिन्हा की कलम से |
भारतीय सनातन परंपरा में संस्कारों का विशेष महत्व है। इन्हीं परंपराओं को जीवंत करते हुए सुशांत कुमार एवं आर्यन राज के उपनयन संस्कार तथा अनन्त कुमार सिन्हा उर्फ वायु के मुंडन संस्कार का भव्य एवं श्रद्धामय आयोजन किया गया। इस मंगल अवसर पर कार्यक्रम की शुरुआत सत्यनारायण भगवान की विधिवत पूजा से हुई। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और वातावरण में गूंजती भक्ति भावना ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।.jpeg)
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पूजा के उपरांत मंडपाच्छादन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। सजे-धजे मंडप, पारंपरिक सजावट और पारिवारिक उल्लास ने इस आयोजन को और भी भव्य बना दिया। मंडपाच्छादन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है, बल्कि यह संस्कारों के शुभ आरंभ का प्रतीक भी माना जाता है। इस दौरान उपस्थित परिजनों और अतिथियों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
उपनयन संस्कार को भारतीय संस्कृति में विद्या, अनुशासन और आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत माना जाता है। सुशांत कुमार एवं आर्यन राज के उपनयन संस्कार को पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न किया गया। गुरु परंपरा, यज्ञोपवीत धारण और मंत्रोच्चार के साथ दोनों बालकों को ज्ञान के मार्ग पर अग्रसर होने का संदेश दिया गया। यह संस्कार केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि जीवन भर के लिए नैतिक मूल्यों की नींव भी है।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में अनन्त कुमार सिन्हा उर्फ वायु का मुंडन संस्कार संपन्न हुआ। मुंडन संस्कार को शारीरिक एवं मानसिक शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। यह विश्वास किया जाता है कि इससे बालक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और वह स्वस्थ, तेजस्वी एवं संस्कारी बनता है। इस संस्कार को देखकर उपस्थित सभी लोगों ने बालक के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस पूरे कार्यक्रम को सफल एवं सुव्यवस्थित बनाने में सुरेन्द्र कुमार रंजन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उन्होंने न केवल व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित किया, बल्कि प्रत्येक धार्मिक अनुष्ठान को समयबद्ध एवं विधिपूर्वक संपन्न कराने में भी अग्रणी भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से यह आयोजन एक आदर्श पारिवारिक एवं सांस्कृतिक समारोह के रूप में यादगार बन गया।
इस शुभ अवसर पर अनेक सम्मानित अतिथियों, परिजनों और शुभचिंतकों ने कार्यक्रम में उपस्थित होकर तीनों बच्चों को अपना स्नेह और आशीर्वाद प्रदान किया। प्रमुख रूप से ठाकुर अरुण कुमार सिंह, जितेन्द्र कुमार सिन्हा, सुरेन्द्र कुमार रंजन, आभा सिन्हा, सुरभि सिन्हा, प्रशांत कुमार सिन्हा, रीता देवी, बृजमाणि पांडेय, सावित्री देवी, मीना देवी, प्रवीण कुमारी, पुष्पा देवी, बबीता देवी, पिंकी कुमारी, रिंकी कुमारी, शोभा देवी, सुनीता देवी, लवली कुमारी, रविन्द्र कुमार रंजन, बिरेन्द्र कुमार रंजन, सुशांत कुमार, आर्यन राज, दीपक कुमार, ऋषिराज, वेद प्रकाश सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पारिवारिक एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत किया। पीढ़ियों को जोड़ने वाले ऐसे संस्कार आज के समय में समाज को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का कार्य करते हैं।
सुशांत कुमार, आर्यन राज और अनन्त कुमार सिन्हा उर्फ वायु के उपनयन एवं मुंडन संस्कार का यह आयोजन श्रद्धा, उल्लास और परंपरा का सुंदर संगम साबित हुआ। सभी उपस्थित लोगों ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य और संस्कारित जीवन की कामना की। यह कार्यक्रम निश्चय ही परिवार और समाज के लिए एक प्रेरणादायक एवं स्मरणीय अवसर बन गया।
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