महाशिवरात्रि
अरुण दिव्यांशमाई के नवरात बा ,
शिव के शिवरात ।
गौरीशंकर परिणय ,
पावन बा बारात ।।
माई गउरी के दुअरा ,
बारात ले संत आईल ।
शरद भईल खतम ,
चहुंओर बसंत आईल ।।
भोले के बारात में ,
जिन्न पिशाच भूत ।
साॅंप बिच्छी मच्छर ,
बारात रहे अद्भुत ।।
दुलहा शिवशंभू भोले ,
पालकी बसहा बैल ।
माई पार्वती दुलहिन ,
शिवजी उनकर छैल ।।
शिवरातो में महाशिवरात ,
भक्त उपासना आराधना ।
नर नारी शिव उपासक ,
शिव पूरा करस साधना ।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
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