आरटीआई कार्यकर्ताओं का हल्ला बोल: बिहार में दम तोड़ रहा सूचना का अधिकार, सुरक्षा और पारदर्शिता पर उठाए गंभीर सवाल

बिहार में सूचना का अधिकार (RTI) कानून और इसे लागू करने वाली संस्थाएं अब कठघरे में हैं। अपनी जान जोखिम में डालकर भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाले देश के विभिन्न राज्यों के आरटीआई कार्यकर्ताओं ने आज पटना में एकजुट होकर बिहार राज्य सूचना आयोग, मुख्य सचिव और राज्यपाल के समक्ष अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
आयोग पर गंभीर आरोप: "लोक सूचना अधिकारियों के रक्षक बने आयुक्त"
प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं का नेतृत्व कर रहे अभिषेक कुमार ने आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बिहार राज्य सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त और अन्य आयुक्त, भ्रष्टाचार को रोकने के बजाय लोक जन सूचना अधिकारियों (PIO) का पक्ष ले रहे हैं।
ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया कि सूचना देने के बजाय आवेदक को हतोत्साहित किया जाता है और अधिकारियों को सूचना छिपाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। यह सीधे तौर पर संसद द्वारा पारित आरटीआई अधिनियम 2005 की मूल भावना की हत्या है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी
कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जाहिर की कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा धारा 4(1)(बी) (जिसके तहत विभागों को स्वतः सूचनाएं सार्वजनिक करनी होती हैं) को लेकर दिए गए स्पष्ट निर्देशों को बिहार सूचना आयोग ने पूरे राज्य में अब तक लागू नहीं करवाया है। इससे पारदर्शिता का दावा केवल कागजों तक सीमित रह गया है।
खून से सिंच रहा RTI: सुरक्षा की मांग पर अड़े कार्यकर्ता
आए दिन आरटीआई कार्यकर्ताओं पर हो रहे जानलेवा हमलों को लेकर मुख्य सचिव को शपथ पत्र के साथ एक विशेष मांग पत्र सौंपा गया। कार्यकर्ताओं ने दोटूक कहा कि यदि सरकार उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करती है, तो भ्रष्टाचार के खिलाफ यह लड़ाई कमजोर पड़ जाएगी।
देशभर के कार्यकर्ता हुए शामिल
इस आंदोलन को धार देने के लिए न केवल बिहार, बल्कि अन्य राज्यों के दिग्गज कार्यकर्ता भी पटना पहुंचे। ज्ञापन देने वालों में मुख्य रूप से:
- मध्य प्रदेश: पवन कुमार मालवी
- पश्चिम बंगाल: रामदेव कुमार
- झारखंड: सत्येंद्र सिंह
- बिहार: अभिषेक कुमार (नेतृत्वकर्ता), युगल किशोर दुबे, सुरेश चंद्र पांडे, प्रवीण कुमार शर्मा, शंभू यादव, रुदल कुमार, रामेश्वर साह, नसीरुद्दीन शाह, अजीत कुमार चौधरी, अमित मोहन, अनिल कुमार, दयानंद व अन्य उपस्थित रहे।
आज के इस प्रदर्शन ने शासन-प्रशासन की नींद उड़ा दी है। अब देखना यह है कि राज्यपाल और मुख्य सचिव इस ज्ञापन पर क्या ठोस कदम उठाते हैं, या आरटीआई कार्यकर्ता यूं ही सिस्टम की बेरुखी और हमलों का शिकार होते रहेंगे।
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