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गया की सामाजिक-धार्मिक चेतना के मजबूत स्तंभ थे पंडित निशिकांत मिश्र : डॉ. विवेकानंद मिश्र

गया की सामाजिक-धार्मिक चेतना के मजबूत स्तंभ थे पंडित निशिकांत मिश्र : डॉ. विवेकानंद मिश्र

गया, संवाददाता।

गया महानगर की सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना का सशक्त प्रतीक रहे पंडित निशिकांत मिश्र के निधन पर शहर में शोक की लहर दौड़ गई। डॉक्टर विवेकानंद पथ स्थित सभागार में भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा द्वारा आयोजित शोकसभा में उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। सभा की अध्यक्षता महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विवेकानंद मिश्र ने की।
इस अवसर पर डॉ. विवेकानंद मिश्र ने कहा कि पंडित निशिकांत मिश्र केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि समाज की आत्मा थे। आम लोगों में ‘निशि बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध पंडित निशिकांत मिश्र ने अपने प्रभावशाली व्यक्तित्व, स्पष्टवादिता और धार्मिक जीवन से गया की धरती पर एक अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तित्व युगों में एक बार जन्म लेते हैं, जो अपने तप, त्याग और तेज से समाज को दिशा देते हैं।
डॉ. विवेकानंद मिश्र ने कहा कि पंडित निशिकांत मिश्र टिकारी रोड स्थित मुरारपुर मोहल्ले में एक साधारण शाकद्वीपीय ब्राह्मण परिवार में जन्मे पंडित निशिकांत मिश्र ने गरीबी को अपने पुरुषार्थ और संकल्प से परास्त किया। उनका पूरा जीवन संघर्ष, साधना और समाज सेवा का प्रतीक रहा। वे अंत तक निर्भीकता और स्पष्टवादिता के साथ अपने विचारों पर अडिग रहे।
धार्मिक क्षेत्र में उनका योगदान अत्यंत उल्लेखनीय रहा। महानगर के प्रसिद्ध पंचमुखी महादेव मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में नाथन बाबा के साथ उनकी सक्रिय भूमिका रही, जिसने गया की धार्मिक परंपराओं को नई ऊर्जा दी।
दुर्गा पूजा के अवसर पर हर साल नवदुर्गा प्रतिमा स्थापना, गया के गांधी मैदान में सहस्त्र चंडी और लक्षचंडी महायज्ञ, आजाद पार्क में नव महाविद्या यज्ञ और प्राचीन तीर्थ रामशिला पहाड़ पर ग्यारह दिवसीय अहर्निश रुद्राभिषेक जैसे भव्य धार्मिक अनुष्ठानों के सफल संचालन में उनका नेतृत्व प्रेरणादायी रहा।
इन आयोजनों के माध्यम से उन्होंने न केवल आस्था को मजबूत किया, बल्कि समाज में एकता, समरसता और सांस्कृतिक जागरूकता का संदेश भी दिया।
पंडित निशिकांत मिश्र सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में भी समान रूप से सक्रिय रहे। वे गया जिला कांग्रेस कमेटी और गया क्षेत्रीय विकास प्राधिकार के अध्यक्ष, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी पं. अनंत देव मिश्र के साथ परिवार के सक्रिय सदस्य की तरह जुड़े रहे और जनहित के कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वर्ष 1990 में गया विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ना उनके आत्मसम्मान और सिद्धांतप्रियता का प्रतीक था। डॉ. बिंदेश्वरी दुबे, भागवत झा आजाद और डॉ. जगन्नाथ मिश्रा जैसे वरिष्ठ नेताओं के दबाव और प्रलोभनों के बावजूद उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस नहीं ली। उनके लिए राजनीति पद प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि जनसेवा का पवित्र दायित्व थी।
सभा में महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आचार्य सच्चिदानंद मिश्र ‘नैकी’ ने कहा कि पंडित निशिकांत मिश्र ने सनातन धर्म की प्रतिष्ठा और सामाजिक समरसता को अपना जीवन लक्ष्य बनाया। उनके द्वारा संपन्न धार्मिक अनुष्ठान केवल परंपरा का निर्वाह नहीं थे, बल्कि समाज को संगठित करने और सांस्कृतिक चेतना को जगाने के सशक्त माध्यम थे।
शोकसभा में उपस्थित आचार्य सच्चिदानंद मिश्र, अजय कुमार मिश्र, रणजीत मिश्र, पंकज कुमार, नंदलाल शर्मा, शोभा देवी, उमेश दास, नम्रता ओझा, मृदुला मिश्रा, शंभू गिरी, अरुण ओझा, हरिनारायण त्रिपाठी, रंजीत पाठक, पवन मिश्रा, अमरनाथ पांडे, रंजना पांडे, संदीप पाठक, दीपक पाठक, सुनील गिरी, सोनी मिश्रा, शशिकला कुमारी सहित अन्य गणमान्य लोगों ने उनकी दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।
पंडित निशिकांत मिश्र आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके कार्य, उनके संस्कार और उनके आदर्श सदैव समाज को प्रेरित करते रहेंगे। गया की पावन धरती उनके योगदान को हमेशा याद रखेगी।

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