Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

"व्यवहार की प्रतिध्वनि"

"व्यवहार की प्रतिध्वनि"

पंकज शर्मा 
मित्रों मनुष्य का आचरण केवल सामाजिक व्यवहार नहीं, बल्कि उसकी आंतरिक चेतना का उद्घाटन होता है। जब हम अपने शब्दों और कर्मों को अपनी ही अभिलाषाओं के दर्पण में परखते हैं, तब आत्मनिरीक्षण की प्रक्रिया प्रारंभ होती है। यही आत्मनिरीक्षण हमें करुणा, संयम और गरिमा की ओर ले जाता है। जो सम्मान हम दूसरों को अर्पित करते हैं, वह वस्तुतः हमारे आत्मसम्मान का विस्तार होता है। इस दृष्टि से देखा जाए तो प्रत्येक व्यवहार एक मौन प्रार्थना है—वैसा ही संसार पाने की, जैसा हम भीतर रचते हैं।


आध्यात्मिक दृष्टि में कर्म बीज हैं और जीवन उसका फल। जो भाव हम दूसरों के प्रति बोते हैं, वही लौटकर हमारे अस्तित्व की मिट्टी को सींचते हैं। प्रेम से रचित कर्म प्रेम का संसार देते हैं, और कटुता से भरे व्यवहार रिक्तता का। मनुष्य भाग्य से नहीं, अपने आचरण से पहचाना जाता है। अंततः वही संसार हमारा आश्रय बनता है, जिसे हमने अपने विचारों और कर्मों से गढ़ा होता है।


. "सनातन"
(एक सोच , प्रेरणा और संस्कार) पंकज शर्मा (कमल सनातनी)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ https://www.facebook.com/divyarashmimag

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ