सदा सबसे ऊंचा रहे तिरंगा
कुमार महेन्द्र
स्वर्णिम _अरुणिम रम्य सौम्य,
हिंद प्राण आन बान शान ।
अष्टप्रहर राष्ट्र स्तुति वंदन,
भारती दिव्य भव्य पहचान ।
केसरिया पट्टिका मनमोहक,
हृदय अविरल साहस शौर्य गंगा ।
सदा सबसे ऊंचा रहे तिरंगा ।।
मोहक श्वेत वर्णी पट्टिका,
शांति सौहार्द मंगलदायक ।
हरित पट्टी अद्भुत अनुपम,
सुख समृद्धि वैभव प्रदायक ।
ललित कलित नील चक्र,
सतत प्रगति आह्वान नंदा ।
सदा सबसे ऊंचा रहे तिरंगा ।।
राष्ट्र ध्वज साक्षात गवाह,
मातृभूमि रक्षा स्वाभिमान ।
परम साक्षी स्वतंत्रता संघर्ष,
दर्शक रणबांकुरी बलिदान ।
पुनीत पावन प्रेरणा सानिध्य,
बुलंद विजयी उद्घोष सुरंगा ।
सदा सबसे ऊंचा रहे तिरंगा ।।
प्रेरक स्नेह प्रेम भाईचारा,
देश प्रेम जागृति अहम सेतु ।
रक्षक निज गौरव प्रतिष्ठा,
नवगीत राष्ट्र विजय श्री हेतु ।
तिरंगी स्नेहिल छत्रछाया तले,
राष्ट्र भविष्य ओजस्वी उत्तंगा।
सदा सबसे ऊंचा रहे तिरंगा ।।
कुमार महेन्द्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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