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दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन ने मनाई - “स्वामी विवेकानंद जी की जयंती”

दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन ने मनाई - “स्वामी विवेकानंद जी की जयंती”

दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन द्वारा स्वामी विवेकानंद जी की जयंती श्रद्धा, उत्साह और प्रेरणादायी वातावरण के साथ मनाई गई। यह आयोजन न केवल एक स्मरणोत्सव था, बल्कि युवाओं और समाज के लिए दिशा देने वाला अवसर भी बना। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वामी विवेकानंद के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना और उनके संदेशों को व्यवहारिक जीवन में उतारने की प्रेरणा देना रहा है।


कार्यक्रम का शुभारंभ फाउंडेशन के निदेशक डॉ. राकेश दत्त मिश्र द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप की ज्योति ने ज्ञान, जागरूकता और आत्मबोध का प्रतीक बनकर पूरे वातावरण को आलोकित कर दिया। इस अवसर पर उपस्थित सभी सदस्यों ने स्वामी विवेकानंद के चित्र पर पुष्प अर्पित किया।


फाउंडेशन के अध्यक्ष जितेन्द कुमार सिन्हा ने अपने संबोधन में स्वामी विवेकानंद के विचारों और उनके राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वामी जी का जीवन युवाओं के लिए ऊर्जा और आत्मविश्वास का स्रोत है। “उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो” जैसे विचार आज भी समाज को आगे बढ़ने की राह दिखाता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और देश तथा समाज के लिए सकारात्मक भूमिका निभाएं।


इस अवसर पर डॉ. ऋचा दुबे, प्रेम सागर पाण्डेय, राजीव रंजन, सुरेन्द्र कुमार रंजन सहित फाउंडेशन के सभी सदस्यों ने स्वामी विवेकानंद जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। सभी ने उनके विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया और उनके बताए मार्ग पर चलने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद के जीवन प्रसंगों और उनके प्रेरणादायी कथनों पर चर्चा हुई, जिससे उपस्थित जनों में नई ऊर्जा का संचार हुआ।


स्वामी विवेकानंद का मानना था कि युवा ही किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। इसी भावना को केंद्र में रखते हुए कार्यक्रम में युवाओं को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और चरित्रवान बनने का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में स्वामी जी के विचार और भी प्रासंगिक हो गया है, जब समाज को नैतिकता, समर्पण और राष्ट्रभाव की आवश्यकता है।


समारोह का समापन स्वामी विवेकानंद जी के प्रेरणादायक विचारों को आत्मसात करने और उन्हें जीवन में उतारने के संकल्प के साथ हुआ। उपस्थित सभी सदस्यों ने यह प्रण लिया कि वे स्वामी जी के आदर्शों को न केवल स्वयं अपनाएंगे, बल्कि समाज में भी उनका प्रचार-प्रसार करेंगे। ——————
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