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शेर सोया हुआ

शेर सोया हुआ अब जाग गया है भाई।

था अँधेरा कभी अब भाग‌ गया है भाई।।


आज आकाश के आँगन में बाँसुरी बजती।
सारा संदर्भ सोंच भाँप गया ‌ है भाई।।


बात बनती नहीं बारूद के जलाने से‌।
बात ही बात में सब नाप गया है भाई।।


अब महंथी का दौर खत्म हुआ सा समझें।
हद जो अब लाँघ णया है भाई।।


झुनझुने रोज बदलने से लाभ का होगा।
लोभ का जोश होस टाँग गया है भाई।।


टैंक के हाथ आग बरसाना खूब हुआ।
बैठ टीले पर कोई बाँग गया है भाई।। 17

डा रामकृष्ण गया जी, बिहार
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