मकर संक्रांति
✍️ डॉ. रवि शंकर मिश्र "राकेश"~~~~~~~~~~~~~~~
मकर संक्रांति केवल पर्व नहीं,
सनातन की आत्मा का आधार है।
जहाँ अनजान थी दुनिया नभ-गति से,
वहीं भारत का खगोल-विस्तार है।
जब अंधकार में भटक रही थी मानवता,
तब ऋषियों ने गिन डाले थे काल।
सूर्य की चाल, ऋतु का संतुलन,
सब शास्त्रों में अंकित था भाल।
उत्तरायण का दिव्य उद्घोष,
तम से प्रकाश की ओर प्रयाण।
कण-कण में विज्ञान समाया,
आस्था में लिपटा सच्चा ज्ञान।
तिल में मधुरता, अग्नि में शुद्धि,
दान में बसता लोक-कल्याण।
परंपरा नहीं, प्रयोगों की थाती,
यही है संस्कृति का विज्ञान।
नभ की रेखाएँ पढ़ लेने वाली,
सनातन की दृष्टि महान।
मकर संक्रांति पर्व नहीं केवल,यह काल-बोध का घोष-गान।
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