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भारत-श्रीलंका हिंदी गौरव’ से सम्मानित हुए साहित्यकार सत्येन्द्र

भारत-श्रीलंका हिंदी गौरव’ से सम्मानित हुए साहित्यकार सत्येन्द्र

कोलंबो (श्रीलंका)। भारत और श्रीलंका के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों की डोर को हिंदी की मिठास से और अधिक मजबूत करते हुए, कोलंबो की ऐतिहासिक धरती पर बिहार के गौरव सत्येन्द्र कुमार पाठक ने एक नया अध्याय लिख दिया है। अरवल (करपी) निवासी प्रख्यात साहित्यकार एवं इतिहासकार श्री पाठक को द्वितीय भारत-श्रीलंका हिंदी सम्मेलन के गौरवशाली मंच पर 'भारत-श्रीलंका हिंदी गौरव सम्मान' से अलंकृत किया गया। विश्व हिंदी दिवस 2026 और स्वामी विवेकानंद जयंती के पावन अवसर पर, पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी (शिलांग) तथा केलणीय विश्वविद्यालय (श्रीलंका) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित '20वें लेखक मिलन शिविर' के अंतर्गत यह भव्य समारोह संपन्न हुआ। इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में श्री पाठक ने ‘हिंदी: वैश्विक संवाद की भाषा’ विषय पर बीज वक्तव्य दिया। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय वसुधैव कुटुंबकम् की संस्कृति को विश्व से जोड़ने वाला सशक्त माध्यम है।
श्रीलंका फाउंडेशन, कोलंबो में आयोजित इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित श्रीलंका में भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा, पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी के अध्यक्ष विमल कुमार बजाज, लेखक मिलन शिविर के संयोजक डॉ. अकेला भाई और स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक प्रो. अंकुरण दत्ता ने श्री पाठक को अंगवस्त्र, सम्मान पत्र और स्वर्ण पदक (मेडल) प्रदान कर सम्मानित किया। समारोह की महत्ता तब और बढ़ गई जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष शुभकामना संदेश मंच से साझा किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह में भारी उत्साह भर दिया।
सत्येन्द्र कुमार पाठक ने बेन्टोटा, नुवारा एलिया, कैंडी और कोलंबो के विभिन्न अकादमिक सत्रों में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और सांस्कृतिक संवर्धन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके द्वारा इतिहास और साहित्य के समन्वय पर दिए गए व्याख्यानों ने श्रीलंकाई विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को भी गहरे तक प्रभावित किया।
श्री पाठक की इस वैश्विक उपलब्धि पर भारत और श्रीलंका के विद्वानों ने हर्ष व्यक्त किया है। बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है, जिनमें प्रमुख रूप से: श्रीलंका से: विदुर विमुक्ति, विश्वनाथ होमग्ना, सोहास गनिडू और अमा श्रीवर्धन। भारत से: स्वर्णिम कला केंद्र की अध्यक्ष डॉ. उषाकिरण श्रीवास्तव, आचार्यकुल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य डॉ. धर्मेंद्र, डॉ. संगीता सागर, हरियाणा के आंसू कवि त्रिलोक चंद, 'निर्माण भारती' के संपादक जी.एन. भट्ट, डॉ. रेणु मिश्रा, डॉ. रेणु शर्मा और दिलीप कुमार अग्रवाल। सत्येन्द्र कुमार पाठक का यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि हिंदी के उस बढ़ते प्रभाव का प्रतीक है जो सीमाओं को लांघकर दिलों को जोड़ रहा है।" — आयोजक समितिजहानाबाद और अरवल जैसे मिट्टी से जुड़े साहित्यकार सत्येंद्र कुमार पाठक का अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मानित होना यह दर्शाता है कि यदि लगन सच्ची हो, तो भाषा की सेवा आपको वैश्विक शिखर तक ले जा सकती है। यह सम्मान भारत-श्रीलंका मैत्री और हिंदी के वैश्विक भविष्य के लिए एक शुभ संकेत है।
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