तडफते हैं दिन-रात, तेरे ख्यालों में बहुत,
ख़्वाबों में रात भर, तूने तडफाया बहुत।सामने आने पर, यूँ मुड़कर चले जाना,
तेरी बेरुखी ने उम्र भर सताया बहुत।
रिश्तों की डोली लिए, दर पर तेरे बैठा रहा,
खामोशियों ने, मजबूरियों को दर्शाया बहुत।
यूँ बेवफाई का इल्जाम, हम पर ना लगाओ,
तेरी माँ का रोता चेहरा, सामने आया बहुत।
तेरी रुसवाई ना हो, ताउम्र यही चाहते रहे,
हमारी चाहत को, बेवफा बताया बहुत।
डॉ अ कीर्तिवर्धन
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