बड़े अदब से

बड़े अदब से

अ कीर्ति वर्द्धन
बड़े अदब से, बेअदबी की बात करते हो,
वफा की बात, मौन साध लिया करते हो।
क्या हुनर पाया है, बेगुनाह बने रहने का,
कत्ल करने के बाद, दर्द की बात करते हो?
जनाजे में शामिल रहे, मेरी मौत के बाद,
दोस्ती का दिखावा, खूब किया करते हो।
जानते थे फ़ितरत, मगर इश्क़ में मजबूर थे,
हमारी बर्बादी पर, जश्न किया करते हो।

अ कीर्ति वर्द्धन
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