जिजीविषा

जिजीविषा

अंकेश
मुश्किलें कम नहीं होती
मुश्किलों से लड़ना होगा
जीवन है इक प्रकृति
प्रकृति में जीना होगा
संघर्ष ही तो है जीवन
जीवन में बढ़ना होगा
मिट्टी हो जाएगी देह
कर्म को अमृत करना होगा
एक बार तो अपनी बात करो
कुछ करना है ध्यान करो
नहीं जगत में विफल होना
इक बार सफल होना होगा
है अपना मकसद भी यही
वंश, परंपरा ,अभिमान धरा का
निज हाथों से , कर्म प्रभाव से
ऊंचा और करना होगा
मेरे तेरे इन हाथों से
मातृभूमि के रज कण में
निष्ठा, प्रेम और खुशी के
अपना अभीष्ट बुनना होगा
युगों युगों से संपूर्ण विश्व में
अमन ,चेतना और संवेदना
का हमने संचार किया है
मन से घृणा का त्याग किया है
पौरुष बल साहस भरता है
बाधाओं को नष्ट करता है
हम भी होंगे अमर इतिहास में
संकल्प यही करना होगा।
मुश्किलों से लड़ना होगा
जीवन है इक प्रकृति
प्रकृति में जीना होगा
अंकेश
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