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आचार्यश्री मत जाइयेगा

आचार्यश्री मत जाइयेगा

विद्या गुरुवर तुम मत जाइयेगा।
हमें छोड़कर तुम मत जाइयेगा।
जहाँ जाइयेगा भक्तों को पाइयेगा।
विद्या गुरुवर तुम मत जाइयेगा।।


भक्तो से छुपकर दिखाओं तो जाने।
ख़यालों में भी तुम न आओ तो जानें।
अजी आप कही भी पहुँच जाइयेगा।
वही आ जायेंगे वही पहुँच जायेंगे।।
विद्या गुरुवर तुम मत जाइयेगा।
हमें छोड़कर तुम मत जाइयेगा।।


जो दिलमें बसे है भूलाना है मुश्किल।
मगर हम से ओझल होना है मुश्किल।
भक्तों की भावनाओं को समझ जाइयेगा।
समझकर जरा दर्शन देते रहिएगा।।
विद्या गुरुवर तुम मत जाइयेगा।
हमें छोड़कर तुम मत जाइयेगा।।


ये कैसी भक्ति है ये कैसी श्रृध्दा है।
न काबू में भक्त है न बस में आत्मा है।
जरा ज्ञान को तुम उड़ेल दीजियेगा।
ठहर जाइयेगा गुरुवर मत जाइयेगा।।
विद्या गुरुवर तुम मत जाइयेगा।
हमें छोड़कर तुम मत जाइयेगा।।
जहाँ जाइयेगा भक्तों को पाइयेगा।
विद्या गुरुवर तुम मत जाइयेगा।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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