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“हरि अनंत, हरि कथा अनंता… ! गांधी नीति की राह विपंता।

“हरि अनंत, हरि कथा अनंता… ! गांधी नीति की राह विपंता।

✍️ डॉ. रवि शंकर मिश्र "राकेश"

हरि अनंत हरि कथा अनंता,
नीति-रीति की राह विपंता।
कौन कहाँ है, किसका दुख है,
मापदंड में थी पूरा अनबंता।

नोखा डोले, जले बस्तियाँ,
विलपे जन-जन हिंदू पंथ।
गांधी बोले,हिंदुओं धैर्य धरो, 
तुम्हें सहना ही है परमकंथ।

पर जब लौ उलटी फिर आई,
अन्य दिशा से फिर हुआ प्रहार।
तब देखो जी अनशन धारण,
गांधी की गति हुई, देखा संसार।

लाहौर रोया, जन चिल्लाए,
रक्षा करो, प्राण अब जाए !
गांधी बोले हँसकर- भाइयो,
मृत्यु को शांति-मन अपनाए।

ध्वज में जैक, चरखा धारित,
विवादों की उठी थी घटाएँ।
पटेल डटे- अब चक्र लगेगा,
गांधी मन में क्षोभ  छिपाएँ।

पचपन करोड़ रुका ज्यों ही,
राष्ट्र बोला- अब बस करना।
गांधी बोले- धन देना होगा,
फिर अनशन का जिद धरना।

शरणार्थी टेंटों में रहे पलते,
दुख की घटा गगन-सी पड़ी।
संपत्ति दी वक्फ को जाकर,
नित करुणा की धारा ही धरी।

पटेल विवश, देश हुआ त्रस्त,
नीति बने, हिंदु को कष्ट अनंता।
इतिहास मरता नहीं कभी,
गांधी नीति से आक्रोशित थी जनता।

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