मिसाइल तकनीक में भारत सर्वोच्च पांच देशों में
नई दिल्ली। चीन ने बीते दिनों हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल के साथ हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण करके दुनियाभर को चैंका दिया था। हालांकि रिपोर्ट बताती हैं कि परीक्षण में पता चला कि इसने दुनिया का चक्कर तो लगाया, लेकिन कुछ ही किलोमीटर पर यह अपने लक्ष्य से चूक गया था। आइए समझते हैं कि भारत मिसाइल तकनीक के मामले में किस स्थान पर है। अगर दुनियाभर में मिसाइल तकनीक की बात करें तो भारत सर्वोच्च 5 देशों में स्थान रखता है लेकिन अभी भी तकनीक के मामले में हम अमेरिका, रूस और चीन से काफी पीछे हैं।
आजादी से पहले भारत में बहुत सारे साम्राज्य मौजूद थे जो युद्ध तकनीक में रॉकेट का इस्तेमाल किया करते थे। मैसूर के राजा हैदर अली ने 18वीं सदी के मध्य में अपनी सेना को लोहे के कवच वाले रॉकेट से परिचित कराया था। हैदर के बेटे टीपू सुल्तान की मौत होने तक उनकी सेना की हर टुकड़ी के साथ एक रॉकेट चलाने वाला जुड़ा हुआ था। एक अनुमान के मुताबिक उनके दल में करीब 5000 रॉकेट चलाने वाले मौजूद थे। आजादी के वक्त भारत में स्वदेशी स्तर पर मिसाइल क्षमता नहीं थी। भारत सरकार ने 1958 में विशेष शस्त्र विभाग का निर्माण किया। यही आगे चलकर डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैबोरेटरी (डीआरडीएल) यानी रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला बना,जिसे 1962 में दिल्ली से हैदराबाद में स्थानांतरित किया गया। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डीआरडीओ की प्रयोगशाला के आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि 1972 में सतह से सतह पर हमला करने वाली मध्यम रेंज की मिसाइल के विकास की शुरुआत प्रोजेक्ट डेविल के नाम से की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में परीक्षण सुविधा और बुनियादी ढांचे का निर्माण हुआ। 1982 आते आते डीआरडीएल, इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईडीएमडीपी) यानी एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम के तहत कई मिसाइल तकनीकों पर काम कर रहा था।
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com