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भाजपा से कुछ तो सीखी कांग्रेस

भाजपा से कुछ तो सीखी कांग्रेस

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

राजनीति में भाजपाई फार्मूले कारगर साबित हो रहे हैं। उदाहरण के लिए भाजपा ने शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश) में गंगा एक्सप्रेस वे का शिलान्यास किया। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में ही शहीद रामप्रसाद बिस्मिल का जन्म हुआ था और 19 दिसम्बर को उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया गया। इस शहीद दिवस पर भाजपा को शाहजहांपुर का महत्व दर्शाना है। इस तरह के कई फार्मूले मिल जाएंगे। उत्तराखण्ड में कांगे्रस ने भी भाजपा के इसी फार्मूले पर काम किया है। कांगे्रस ने उत्तराखण्ड चुनाव अभियान के चलते ही वीर ग्राम पराजय यात्रा निकालने का निश्चय किया है। यह यात्रा हेलिकाप्टर हादसे में शहीद हुए पूर्व सीडी एस जनरल विपिन रावत के पैतृक गांव से निकाली जाएगी। इससे पूर्व 16 दिसम्बर को उत्तराखण्ड में राहुल गांधी की रैली में भी दिवंगत जनरल विपिन रावत के बड़े-बड़े कटआउट लगाए गये थे।

राजनीतिक दल वोटरों को कई तरह से रिझाते हैं। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले सैनिक और उनके परिवारों के वोटों पर सभी राजनीतिक पार्टियों की नजर है। देहरादून के परेड ग्राउंड में गत दिनों हुई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की विशाल रैली में गांधी परिवार के नेताओं के साथ ही जनरल बिपिन रावत के बड़े कट आउट लगाए गए। यही नहीं, पिछले दिनों चॉपर क्रैश में शहीद हुए तमाम सैनिकों के चित्र भी कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए थे। सैनिकों के सम्मान में ‘विजय सम्मान रैली’ का आयोजन कर रही कांग्रेस सीधे तौर पर उत्तराखंड के सैन्य परिवारों के वोट को टारगेट करती हुई नजर आ रही है। कांग्रेस ने उत्तराखंड चुनाव अभियान के अपने सिलसिले में ‘वीर ग्राम पराक्रम यात्रा’ का ऐलान करते हुए बताया कि यह यात्रा पौड़ी गढ़वाल के गांव से शुरू की जाएगी। उत्तराखंड के सैनिकों के योगदान को सराहने और याद करने के आइडिया पर केंद्रित होकर इस यात्रा को खास ढंग से शुरू किया जा रहा है। पिछले दिनों एक हवाई हादसे में दिवंगत हुए पूर्व सीडीएस जनरल बिपिन रावत के पैतृक गांव से कांग्रेस इस यात्रा का आगाज करने जा रही है तो इसके पीछे उसकी खास रणनीति साफ दिख रही है।

1971 के युद्ध में शामिल रहे पूर्व सैनिकों के सम्मान में आयोजित इस रैली में एक तरफ पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बड़े कटआउट लगाए गए तो राहुल गांधी के कटआउट के आकार से बड़ा जनरल रावत का चित्र लगाया गया। उत्तराखंड में सेवारत सैनिकों के साथ ही पूर्व सैनिकों के परिवारों के वोट बड़ी अहमियत रखते हैं। इन्हीं कारणों से भाजपा ने सैन्य धाम के शिलान्यास का कार्यक्रम किया, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जनरल रावत के नाम पर स्मारक के प्रवेश द्वार का नामकरण करने का ऐलान किया। भाजपा ने भी 200 सैन्य परिवारों का सम्मान किया। जनरल रावत के कटआउट लगाए जाने के बारे में कांग्रेस के उत्तराखंड अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि कांग्रेस ने हमेशा ही सैनिकों का सम्मान किया है। गोदियाल ने कहा, ‘जनरल रावत देश का गौरव रहे। उनका ताल्लुक उत्तराखंड से रहा और वह अपने प्रदेश के भले के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहे। उनके कटआउट लगाकर कांग्रेस ने महान सैनिक के प्रति अपनी श्रद्धा भाव दर्शाया है।’ इस मामले में भाजपा ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए इसे वोटों की राजनीति कहा है। पार्टी के प्रवक्ता विपिन कैंथोला ने कहा कि चुनाव आते ही सैनिकों से कांग्रेस का प्रेम समझा जा सकता है लेकिन कांग्रेस को जनरल रावत के नाम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हालांकि भाजपा खुद सैन्य धाम के लिए शहीदों के आंगन की मिट्टी जुटाने का अभियान चला चुकी है। कांग्रेस के चुनाव अभियान प्रमुख हरीश रावत कहते हैं कि यह यात्रा 20 या 21 दिसंबर से शुरू होगी, जब जनरल रावत के लिए शोक की औपचारिक अवधि पूरी हो जाएगी। कांग्रेस ने अपनी इस यात्रा में उत्तराखंड के ज्यादा से ज्यादा गांवों में पहुंचने का लक्ष्य रखा है यानी कुल करीब 17,000 गांवों में से कांग्रेस इस यात्रा को हजारों गांवों तक पहुंचाने की आस में है। उत्तराखंड में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के इस ऐलान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जनरल रावत के नाम को राजनीतिक लाभ के लिए कांग्रेस भुनाने की फिराक में है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कांग्रेस नेता सेना का अपमान कर चुके हैं और जनरल रावत को ‘गुंडा’ तक कह चुके हैं। धामी ने कहा, ‘अब ये लोग उनके पैतृक गांव में यात्रा निकालने जा रहे हैं, लोग सब समझते हैं कि वो ऐसा क्यों कर रहे हैं।’ जाहिर है कि कांग्रेस की यह यात्रा भाजपा को एक खतरा जैसी लग रही है।

कांग्रेस ने उत्तराखंड चुनाव अभियान के अपने सिलसिले में ‘वीर ग्राम पराक्रम यात्रा’ का ऐलान करते हुए बताया कि पिछले दिनों एक हवाई हादसे में दिवंगत हुए पूर्व सीडीएस जनरल बिपिन रावत के पैतृक गांव से कांग्रेस इस यात्रा का आगाज करने जा रही है तो इसके पीछे उसकी खास रणनीति साफ दिख रही है। हालांकि राहुल गांधी की रैली में जनरल रावत के कटआउट लगने से राजनीतिक विवाद सुर्खियों में थे लेकिन कांग्रेस ने कट आउट विवाद को दरकिनार करते हुए अपनी इस चुनावी यात्रा का ऐलान कर दिया और यह भी बताया है कि जनरल रावत के पैतृक गांव सैंण से इस यात्रा का शुभारंभ होगा। कांग्रेस के चुनाव अभियान प्रमुख हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस ने अपनी इस यात्रा में उत्तराखंड के ज्यादा से ज्यादा गांवों में पहुंचने का लक्ष्य रखा है यानी कुल करीब 17,000 गांवों में से कांग्रेस इस यात्रा को हजारों गांवों तक पहुंचाने की आस में है।

उत्तराखंड में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के इस ऐलान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जनरल रावत के नाम को राजनीतिक लाभ के लिए कांग्रेस भुनाने की फिराक में है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कांग्रेस नेता सेना का अपमान कर चुके हैं और जनरल रावत को ‘गुंडा’ तक कह चुके हैं। धामी ने कहा, ‘अब ये लोग उनके पैतृक गांव में यात्रा निकालने जा रहे हैं, लोग सब समझते हैं कि वो ऐसा क्यों कर रहे हैं।’ चुनाव में कांग्रेस के पोस्टर चेहरे के तौर पर उभरे हरीश रावत ने भाजपा के इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जनरल रावत उत्तराखंड के गौरव रहे हैं। किसी पार्टी को हमसे ‘असुरक्षा’ क्यों महसूस हो रही है? उन्होंने कहा, ‘कोई पार्टी या व्यक्ति हमसे जनरल रावत को याद करने का हक छीन नहीं सकती। जिन लोगों ने महात्मा गांधी को गालियां दीं, कांग्रेस ने कभी उनसे गांधी की याद या तारीफ करने का हक नहीं छीना।’ बहरहाल, जैसे जैसे चुनाव प्रचार की गति बढ़ रही है, उत्तराखंड के चुनाव से पहले श्रेय लेने की राजनीति भी बढ़ती जा रही है। (हिफी)
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