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क्या ‘मांझी’ डुबोएंगे नाव?

क्या ‘मांझी’ डुबोएंगे नाव?

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

मांझी के हाथ में पतवार इसलिए दी जाती है कि वह नौका को दूसरे किनारे तक पहुंचा देगा लेकिन बिहार का एक मांझी तो नाव डुबो देना चाहता है। बेशक, उसके हाथ में पतवार नहीं है लेकिन राजनीति की नाव तो कई पतवारों के सहारे ही पार लगती है। बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में भाजपा और जद(यू) के साथ हिन्दुस्तान अवाम मोर्चा (हम) भी प्रमुख घटक है। हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की आगामी जनवरी में शुरू होने वाली बेरोजगारी हटाओ यात्रा का समर्थन किया है। यह यात्रा नीतीश कुमार की सरकार की नाकामी को प्रदर्शित करने वाली होगी और मांझी उसी सरकार के विरोध में खड़े हो गये हैं? राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि राजद के नेतृत्व वाला महागठबंधन जीतनराम मांझी को एनडीए से तोड़ना चाहता है जबकि जद(यू) के प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा है कि जीतनराम मांझी एनडीए के अभिन्न अंग है। हालांकि मांझी अपने बयानों से एनडीए के सामने लगातार मुसीबतें खड़ी करते रहते हैं। दो दिन पहले ही मांझी ने ब्राह्मणों को लेकर विवादास्पद बयान दिया था।

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को एक बार फिर से हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का समर्थन मिला है। जीतन राम मांझी ने तेजस्वी यादव द्वारा जनवरी में शुरू होने वाली बेरोजगारी हटाओ यात्रा का समर्थन किया है। जीतन राम मांझी ने पटना में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए इस बात को स्वीकार किया है कि बिहार में बेरोजगारी अभी भी एक बड़ी समस्या है। तेजस्वी यादव द्वारा इस तरह की यात्रा निकाले जाने को लेकर जीतन राम मांझी ने कहा कि वह प्रतिपक्ष के नेता हैं और अगर वो बेहतर समझते हैं कि बिहार में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है तो उन्हें इस बात का हक है कि वह इस तरह की यात्रा पर निकलें। जीतन राम माझी ने कहा कि जिस तरीके से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शराबबंदी कानून को लेकर समाज सुधार अभियान शुरू कर रहे हैं, ऐसे में शराबबंदी कानून को लेकर उन्हें ग्राउंड पर रियलिटी नजर आएगी। कुछ लोगों द्वारा शराबबंदी कानून को लेकर सवाल उठाए जाने को मांझी ने गलत करार दिया और कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में जिस तरीके से शराबबंदी कानून लागू किया है, वह बेहतर कदम है। मांझी की मानें तो शराब बंदी कानून को लेकर सीएम जैसे समाज सुधार अभियान पर निकल रहे हैं तो प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव भी बेरोजगारी हटाओ यात्रा पर निकल सकते हैं, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है।

मांझी ने अप्रत्यक्ष रूप से नीतीश सरकार पर हमला किया। जीतन राम मांझी ने माना कि बिहार में बेरोजगारी एक अहम समस्या है लेकिन साथ में उन्होंने कहा कि यह केवल बिहार की समस्या नहीं बल्कि पूरे देश की समस्या है। मांझी द्वारा तेजस्वी यादव को अपने बयानों के माध्यम से दिए गए समर्थन पर राजद नेता इसे राजनीतिक चश्मे से देखने लगे हैं। पार्टी के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि जीतन राम मांझी एनडीए में घुटन महसूस कर रहे हैं और वो तेजस्वी यादव को बिहार का भावी मुख्यमंत्री के रूप में देख रहे हैं, यही कारण है कि वे तेजस्वी यादव की बेरोजगार यात्रा को अपना खुला समर्थन दे रहे हैं। दूसरी तरफ मांझी के बयान पर राजद की प्रतिक्रिया को जदयू नेता राजद द्वारा देखा जाने वाला मुंगेरीलाल का हसीन सपना बता रहे हैं। जदयू के प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा कि जीतन राम मांझी एनडीए के अभिन्न अंग हैं, जिन्हें तोड़ना राजद के वश की बात नहीं है।

पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी विवादास्पद बयान देते रहते हैं। इसी सिलसिले में उनके ब्राह्मणों पर दिए आपत्तिजनक बयान से बिहार की सियासत गर्मा गई है। तमाम राजनीतिक पार्टियों ने इसे लेकर मांझी पर हमला बोला है और उन्हें नसीहत दी है कि वो भविष्य में कभी इस तरह के बयान न दें लेकिन बिहार बीजेपी के उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक मिथिलेश तिवारी ने इससे हट कर 11 बिंदुओं को सिलसिलेवार लिख कर जीतन राम मांझी को यह बताने का प्रयास किया है कि ब्राह्मणों का समाज को एक साथ जोड़े रखने में बड़ा योगदान है।

मिथिलेश तिवारी ने कहा कि एक यज्ञ में ब्राह्मण इतने समाज के लोगों को एक साथ जोड़ता है यह बात शायद जीतन राम मांझी नहीं जानते हैं। उदाहरण के लिए डाला के लिए डोम, मानर पुजाई के लिए चमईन, मिट्टी का बर्तन के लिए कुम्हार, लकड़ी की आसनी के लिए लोहार, नौ ग्रह की लकड़ी एवं मुंडन के लिए हजाम, गाय का दूध, दही, घी, मूत्र, गोबर के लिए यादव, फूल के लिए माली, कपड़ा सिलाई के लिए दर्जी, पूजा-पाठ में फल के लिए कुशवाहा, मिठाई एवं चूल्हा पुजाई के लिए हलवाई और पान और ताम्बुल के लिए पनहेरी की आवश्यकता होती है।

वहीं, बीजेपी के विधायक नीतीश मिश्रा ने भी जीतन राम मांझी के बयान को गलत बताते हुए कहा कि हिंदू धर्म और ब्राह्मणों के प्रति की गई उनकी टिप्पणी से जनमानस आहत है। इस तरह का बयान समाज के सौहार्द को बिगाड़ने का काम करता है। हम सभी का यह प्रयास होना चाहिए कि समाज को जोड़कर एक साथ रखें न कि उसमें वैमस्यता पैदा करें।

ध्यान रहे कि 18 दिसम्बर की शाम पटना में एक कार्यक्रम में शिरकत करते हुए जीतन राम मांझी ने ब्राह्मणों और देवी-देवताओं के लिए बेहद अपमानजनक शब्द का प्रयोग किया था। मांझी ने कहा कि लोग आज कल सत्यनारायण भगवान की पूजा करवा रहे हैं, और पंडित ’’’’ (गाली) आते हैं तो बोलते हैं हम खायेंगे नहीं, नगद (पैसा) दीजिये। मांझी यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि पहले गरीबों के बीच यह पूजा देखने को नहीं मिलती थी लेकिन आज कल खूब हो रही है। बाबा भीमराव अंबेडकर का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जीवन के अंतिम दौर में बाबा साहब ने हिंदू धर्म को खराब बताया था। उनका निधन बौद्ध होकर हुआ था। जीतन राम मांझी के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। हालांकि बयान पर बवाल बढ़ने पर पूर्व मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर इस पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों को लेकर उनके वीडियो के उस पार्ट को ही केवल वायरल किया जा रहा है जिससे विवाद खड़ा हो सके। मांझी ने कहा कि बयान को समझने के लिए उसे पूरा सुनने की जरूरत है। उनके दिल में हर तबके के लिए सम्मान और इज्जत है। उन्होंने कहा कि उन्होंने ब्राह्मणों को नहीं, बल्कि अपने समाज के लोगों के लिए अपशब्द (गाली) यूज किया था। अगर नहीं हो तो मैं माफी

मांगने को तैयार हूं। मांझी की सवर्ण विरोधी भावना पहले भी सामने आ चुकी है। (हिफी)
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