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केएमसी पर ममता की पहली जीत

केएमसी पर ममता की पहली जीत

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

भाजपा से लड़ाई में तृणमूल कांगे्रस (टीएमसी) की नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी छोटी से छोटी जीत को भी सेलिब्रेट करती हैं। इससे उनका राजनीतिक आधार भी मजबूत होता है। अभी 16 दिसम्बर को एक छोटी सी जीत से टीएमसी नेताओं के चेहरे खिल उठे। राज्य में विधानसभा चुनाव के बाद पिछले महीने (नवम्बर में ) हुए उपचुनाव में भी ममता बनर्जी ने भाजपा को पटकनी दी थी। अब 19 दिसम्बर को कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के चुनाव होने हैं। इन चुनावों में भी भाजपा ही मुख्य प्रतिद्वन्द्वी है। भाजपा ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक अपील दायर करके मांग की थी कि राज्य की पुलिस पर भरोसा नहीं है, इसलिए केएमसी चुनाव में केन्द्रीय पुलिस बल की तैनाती का निर्देश दिया जाए। कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने भाजपा की यह मांग खारिज कर दी है। टीएमसी इसे केएमसी चुनाव में अपनी पहली जीत मान रही है। न्यायालय ने चुनाव आयोग को यह निर्देश जरूर दिया है कि कोलकत्ता के 144 बूथों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाकर ही मतदान करवाया जाए।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 16 दिसम्बर को निर्देश दिया कि कोलकाता नगर निगम चुनाव के लिए सुरक्षा राज्य पुलिस बल प्रदान करेगा। अदालत ने यह निर्देश चुनाव के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती के अनुरोध वाली बंगाल भाजपा की एक अर्जी खारिज करते हुए दिया। न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा ने निर्देश दिया कि कोलकाता पुलिस आयुक्त चुनाव प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों या अन्य सभी की शिकायतों का ध्यान रखेंगे।

भाजपा राज्य इकाई ने 14 दिसंबर को उच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका दायर की थी, जिसमें कोलकाता निकाय चुनाव के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती का अनुरोध किया गया था। भाजपा इकाई ने अर्जी में आशंका व्यक्त की थी कि उसके उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को धमकी और हमलों का सामना करना पड़ सकता है। भाजपा ने पहले इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी लेकिन शीर्ष अदालत ने उसे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा था।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 144 वार्ड वाले कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के 19 दिसंबर को होने वाले चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष प्रताप बंदोपाध्याय ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा था कि पार्टी पुराने और नए चेहरों दोनों को उनके ‘ट्रैक रिकॉर्ड’ और जनाधार को ध्यान में रखते हुए मैदान में उतारना चाहती है। बंदोपाध्याय ने कहा, ‘हमने 50 महिलाओं और 48 युवाओं को मैदान में उतारा है। सूची में एक पूर्व कर्नल और पांच वकीलों के अलावा स्कूल के शिक्षक, प्रोफेसर, डॉक्टर हैं। पार्टी ने उन्हें चुना है जिनकी साफ-सुथरी छवि और अच्छा ‘ट्रैक रिकॉर्ड’ है।

इसीलिए भाजपा ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था कि किसी को डराया-धमकाया न जा सके। कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने चुनाव आयोग को नगर निगम चुनाव के लिए कोलकाता के 144 बूथों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया है। राज्य निर्वाचन आयोगकी ओर से जारी की गई अधिसूचना के अनुसार, 144 वार्ड में 21 दिसंबर को मतगणना की जाएगी। राज्य निर्वाचन आयुक्त सौरव दास ने कहा, ‘ केएमसी चुनाव के लिए 19 दिसंबर को मतदान होगा और 21 दिसंबर को मतगणना की जाएगी। आज से आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। हमने

अधिसूचना जारी कर दी है।’ इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार, राज्य चुनाव आयोग और अन्य पदाधिकारियों को व्यापक कार्य योजना तैयार करने और कोलकाता में स्वतंत्र और निष्पक्ष नगरपालिका चुनाव सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त केंद्रीय पुलिस बल तैनात करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। जज जस्टिस एल नागेश्वर राव और जज जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने राज्य भाजपा को याचिका वापस लेने और अपनी शिकायतों और राहत की मांग को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट जाने के लिए कहा था भाजपा चाहती थी कि राज्य की राजधानी में 19 दिसंबर को होने वाले नगर निकाय चुनावों के सुचारू और निष्पक्ष संचालन के लिए अधिक केंद्रीय बलों को तैनात किया जाए। पश्चिम बंगाल भाजपा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने कहा कि निकाय चुनावों की अधिसूचना और भाजपा द्वारा इसके लिए उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने के बाद पार्टी के उम्मीदवारों को धमकाया गया और दबाव बनाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि शिकायत दर्ज की गई है, लेकिन अब तक राज्य पुलिस ने कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की है। पीठ ने पूछा, ‘क्यों 32 (संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत, एक याचिका सीधे सुप्रीम कोर्ट में दायर की जाती है)।’ न्यायालय ने कहा कि हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की जानी चाहिए, जो सुरक्षा और अन्य स्थानीय पहलू के बारे में अधिक जानकार है।

प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता शमिक भट्टाचार्य कहते हैं- भाजपा निगम चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। हमने ढाई महीने पहले 75 प्रतिशत नामों पर फैसला कर लिया था।’ भाजपा द्वारा कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष एक ही चरण में राज्य के सभी नगर निकायों के चुनाव कराने के लिए दायर याचिका के बारे में भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी इस मामले पर न्यायपालिका के निर्णय का इंतजार करेगी। भाजपा चुनाव प्रबंधन समिति के प्रभारी प्रताप बनर्जी ने कहा, ‘हमने केएमसी चुनाव लड़ने के लिए लगभग 48-50 युवा चेहरों और लगभग 50 महिलाओं को मैदान में उतारा है। पांच वकील, एक पूर्व कर्नल, तीन डॉक्टर और चार शिक्षक/प्रोफेसर मैदान में हैं। हमने करीब 21 कारोबारियों और छात्रों को भी मौके दिए हैं और हम अच्छे नतीजों की उम्मीद कर रहे हैं।’

बहरहाल कोलकाता निकाय चुनावों में केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग वाली भाजपा की याचिका खारिज कर दी गयी है। इससे पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार, राज्य चुनाव आयोग और अन्य पदाधिकारियों को व्यापक कार्य योजना तैयार करने और कोलकाता में स्वतंत्र और निष्पक्ष नगरपालिका चुनाव सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त केंद्रीय पुलिस बल तैनात करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। टीएमसी इसी को अपनी जीत मान रही है लेकिन कोलकाता के नागरिक 19 दिसम्बर को क्या फैसला सुनाते हैं, इसका पता तो 21 दिसम्बर को ही चल पाएगा। ध्यान देने की बात यह है कि ममता बनर्जी कोलकाता नगर निगम चुनाव से ही वामपंथी सत्ता को चुनौती देने मैदान में उतरी थीं। (हिफी)
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