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नेपाली कांग्रेस को देउबा पर भरोसा

नेपाली कांग्रेस को देउबा पर भरोसा

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

भारत में कांग्रेस भले ही दुर्दिन का शिकार हो गयी है लेकिन हमारे पड़ोसी देश नेपाल में सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी नेपाली कांग्रेस ने वामपंथियों को पछाड़कर सत्ता पर कब्जा कर लिया है। शेर बहादुर देउबा पांचवीं बार प्रधानमंत्री बने हैं। पार्टी को भी देउबा पर भरोेसा है। इसलिए एक बार फिर उन्हंे पार्टी का अध्यक्ष चुना गया है। भारत के प्रति नरम रवैया अपनाने वाली नेपाली कांग्रेस के सत्ता में रहने और मजबूत संगठन के चलते अच्छे भविष्य की उम्मीद की जा सकती है। पूर्व प्रधानमंत्री और वामपंथी नेता केपी शर्मा ओली ने तो कई विवाद खड़े कर दिये थे और उनका झुकाव चीन की तरफ ज्यादा था। नेपाली कांग्रेस में भी गुटबाजी से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि शेर बहादुर देउबा को पार्टी का अध्यक्ष बनने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला के भतीजे शेखर कोइराला से मुकाबला करना पड़ा।

नेपाल की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी नेपाली कांग्रेस ने 15 दिसम्बर को एक बार फिर प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा को पार्टी का अध्यक्ष चुना। नेपाली कांग्रेस के 14वें महाअधिवेशन के अनुसार, देउबा को दूसरे चरण के चुनाव में 2733 मत मिले और उन्होंने शेखर कोइराला को मात दी, जिन्हें 1855 मत मिले थे। कोइराला ,पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला के भतीजे हैं। मतदान में कुल 4,623 वोट डाले गए थे और 35 मतों को अवैध घोषित कर दिया गया। पहले चरण के चुनाव में कोई फैसला नहीं हो सका था क्योंकि पांच उम्मीदवारों में से किसी को भी 50 प्रतिशत से अधिक मत का स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। पार्टी के नियमों के मुताबिक, पार्टी का अध्यक्ष बनने के लिए उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त करने होते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो पहले और दूसरे चरण के मतदान में सर्वाधिक वोट पाने वाले उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होता है। 14 दिसम्बर को दूसरे चरण का चुनाव हुआ था। इस सबसे पुरानी पार्टी के 13 पदाधिकारियों- एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष, दो महासचिव, आठ संयुक्त महासचिव और केन्द्रीय कार्य समिति के 121 सदस्यों के चयन के लिए ये चुनाव कराए गए थे।

यह भी ध्यान देने की बात है कि नेपाली कांग्रेस के प्रमुख शेर बहादुर देउबा 5वीं बार देश के प्रधानमंत्री नियुक्त किए गए हैं। यह कदम कम्युनिस्ट पार्टी के नेता और कार्यवाहक प्रधानमंत्री की भूमिका निभा रहे केपी शर्मा ओली के लिए बड़ा झटका था। राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने संविधान के अनुच्छेद 76(5) के तहत उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त किया। यह पांचवीं बार है जब देउबा (74) ने नेपाल के प्रधानमंत्री के तौर पर सत्ता में वापसी की है। उनकी नियुक्ति उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले के बाद हुई है। कोर्ट ने के पी शर्मा ओली को हटाते हुए प्रधानमंत्री पद के लिए देउबा के दावे पर मुहर लगाई थी।राष्ट्रपति कार्यालय ने देउबा को उनकी नियुक्ति के बारे में सूचित किया था।

इससे पहले शेर बहादुर देउबा 4 बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं। इसमें पहली बार सितंबर 1995- मार्च 1997, दूसरी बार जुलाई 2001- अक्टूबर 2002, तीसरी बार जून 2004- फरवरी 2005 और चैथी बार जून 2017-फरवरी 2018 तक- प्रधानमंत्री रह चुके हैं। संवैधानिक प्रावधान के तहत प्रधानमंत्री के तौर पर नियुक्ति के बाद देउबा को 30 दिनों के अंदर सदन में विश्वास मत हासिल करना था। सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री ओली के 21 मई के संसद की प्रतिनिधि सभा को भंग करने के फैसले को रद्द कर दिया था और देउबा को प्रधानमंत्री नियुक्त करने का आदेश दिया था। प्रधान न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर राणा के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था कि प्रधानमंत्री के पद पर ओली का दावा असंवैधानिक है। इससे पूर्व नेपाल के विपक्षी दलों ने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व में नई सरकार बनाने का दावा पेश करने का फैसला किया था। इसके बाद नेपाल में चल रहे राजनीतिक संकट के हालात में नया मोड़ आ गया। नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली ने भी सरकार बनाने का दावा पेश किया। उन्होंने सीपीएन-यूएमएल के 121, जनता समाजवादी पार्टी के 32 और कुछ अन्य छोटे दलों के समर्थन पत्र के साथ राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से मुलाकात की। ओली का दावा था कि वो इन दलों के समर्थन से संसद में बहुमत साबित कर देंगे। विपक्षी गठबंधन के नेता नई सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी के आधिकारिक आवास पर पहुंचे। नेपाली कांग्रेस (एनसी), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर), जनता समाजवादी पार्टी (जेएसपी) के उपेंद्र यादव नीत धड़े और सत्तारूढ़ सीपीएन-यूएमएल के माधव नेपाल नीत धड़े समेत विपक्षी गठबंघन ने प्रतिनिधि सभा में 149 सदस्यों का समर्थन होने का दावा किया है।

इन सदस्यों में नेपाली कांग्रेस के 61, सीपीएन (माओइस्ट सेंटर) के 48, जेएसपी के 13 और यूएमएल के 27 सदस्यों के शामिल होने का दावा किया गया। विपक्षी गठबंधन के नेता 149 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ सरकार बनाने का दावा करने वाला पत्र राष्ट्रपति को सौंपने के लिए उनके सरकारी आवास शीतल निवास पहुंचे। इस पत्र में शेर बहादुर देउबा को प्रधानमंत्री बनाने की सिफारिश की गई।

देउबा 2017 में आम चुनावों के बाद से विपक्ष के नेता थे। राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने राजनीतिक दलों को नयी सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए समय दिया था। सरकार ने राष्ट्रपति भंडारी से सिफारिश की थी कि नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 76 (5) के अनुरूप नयी सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाए क्योंकि प्रधानमंत्री ओली को 10 मई को उनके दोबारा चुनाव के बाद प्रतिनिधि सभा में 30 दिन के अंदर बहुमत साबित करना था। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के नेतृत्व वाले मुख्य विपक्षी दल सीपीएन-यूएमएल ने बुधवार को संसद के नए सत्र को बाधित किया और उन 14 सांसदों को निलंबित करने की मांग की जो उनकी पार्टी छोड़कर माधव कुमार नेपाल की पार्टी में शामिल हो गए थे। संसद के निचले सदन का नौवां सत्र पहले दिन सीपीएन-यूएमएल (एकीकृत माक्र्सवादी-लेनिनवादी) द्वारा बाधित करने के बाद थोड़े समय के लिए दो बार स्थगित किया गया। पार्टी ने सीपीएन-यूएमएल के 14 पूर्व सांसदों के निलंबन की मांग करते हुए संसद की कार्यवाही बाधित की। इन सांसदों ने माधव कुमार नेपाल के नेतृत्व में नई पार्टी बना ली। माधव कुमार नेपाल ने तत्कालीन सीपीएन- यूएमएल को छोड़कर नई पार्टी सीपीएन-यूनिफाइड सोशलिस्ट का गठन कर लिया था, जो अब संसद में चैथी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। उनके धड़े ने प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की गठबंधन सरकार में शामिल होने का फैसला किया था। (हिफी)
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